अमृतसर. सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंड्री एजुकेशन, अमेरिका जैसे देशों को टक्कर दे रहा है। इससे जुड़े स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर, बच्चों की भारी तादाद और टीचरों के पढ़ाने के तौर-तरीके विदेशियों को हैरानी में डाल देते हैं।
यह खुलासा यूएसए के हावर्ड ग्रेजुएट स्कूल आफ एजुकेशन कैंब्रिज में आयोजित पांच दिवसीय प्रोग्राम कनैक्टिंग माइंड, ब्रेन एंड एजुकेशन में हुआ। दुनिया भर से पहुंचे शिक्षाविदों ने सीबीएसई की वस्तुस्थिति को समझ रखने पर इसका लोहा माना।
कैंब्रिज में 26 जून से शुरू हुए इस आयोजन में पूरे देश से सात शिक्षाविद पहुंचे थे। इसमें पंजाब की तरफ से स्प्रिंगडेल्स सीनियर स्कूल के वाइस प्रिंसिपल राजीव शर्मा भी शामिल थे।
सफलता का राज मेहनत
सेमिनार के डिसकशन पैनल में राजीव शर्मा को भी डाला गया था। जब वहां पर एजुकेशनल माडल को पेश किया गया तो राजीव ने भी सीबीएसई का माडल पेश किया। इस दौरान यह तथ्य उभर कर सामने आया कि यहां का सीबीएसई बोर्ड वहां के बोर्ड से भी एडवांस है। हालांकि हावर्ड एजुकेशन पर रिसर्च करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी एजुकेशनल संस्था है।
राजीव ने वहां पर कुछ गाइड लाइंस भी दीं। राजीव ने बताया कि हमारे यहां पर बच्चे इसलिए जीनियस होते हैं क्योंकि उनको शुरू से ही मेहनत करने को कहा जाता है, जो आगे चल कर उनकी सफलता का कारण बनता है। जबकि इसके विपरीत विदेशों में बच्चों को शुरुआत में ज्यादा आजादी दी जाती है। राजीव का सुझाव था कि इन दोनों को अगर मिला कर माडल तैयार किया जाए तो स्थिति और भी बेहतर होगी।
खुद में उपलब्धि सीबीएसई
राजीव शर्मा ने बताया कि सेमिनार में स्पष्ट हुआ कि अमेरिका समेत अन्य देशों के बच्चों में 25 फीसदी तक लर्निग डिफिसिएंसी होती है जबकि सीबीएसई पैटर्न के बच्चों में मात्र एक से दो फीसदी। उन्होंने बताया कि जब हमने कहा कि हमारे स्कूलों में पांच-पांच हजार बच्चे पढ़ते हैं, तो लोगों को हैरानी हुई। उनका मानना था कि इतने बच्चे और सभी सब्जैक्ट्स में बेहतर नतीजे खुद में उपलब्धि है। क्योंकि उनके यहां जिस स्कूल में 1,000 बच्चे पढ़ रहे हों उसे बहुत बड़ा स्कूल माना जाता है।
पीएसईबी की भी हुई चर्चा
सेमिनार में देश-विदेश से पहुंचे अन्य विद्वानों के साथ राजीव शर्मा ने भी अपने स्टेट बोर्ड पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड का भी पक्ष रखा। इस दौरान बोर्ड की स्थिति और स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर भी चर्चा हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने कुछ सुधार करने की भी बात कही। उन्होंने बताया कि कुल मिला कर पांच दिन का उक्त सेमिनार शिक्षा की दृष्टि से बेहतर रहा।