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आठ फीसदी बन सकती है सपना

मुंबई. एक समय था जब यूपीए सरकार मुल्क को दस फीसदी विकास दर के सब्जबाग दिखा रही थी। अब हालात एकदम बदल गए हैं। आठ फीसदी विकास दर भी मुश्किल लग रही है। खुद वित्त मंत्रालय के अधिकारी मान रहे हैं कि विकास दर का संशोधित आंकड़ा आठ फीसदी करना पड़ सकता है। वित्तीय सेवा के क्षेत्र में सक्रिय सिटी ग्रुप ने तो नई रिपोर्ट में साफ कह दिया है कि भारत ने नौ फीसदी विकास दर बनाए रखने का मौका को दिया है। उसके मुताबिक 2009-10 में विकास दर सात फीसदी से कुछ ज्यादा हो सकती है।

सिटी ग्रुप की अर्थशास्त्री रोहिणी मलकानी का कहना है कि निवेश में गिरावट आएगी। निवेश की दर 2009 व 2010 में क्रमश: 10.4 व 7.9 फीसदी रहेंगी। मलकानी का कहना है कि मुद्रास्फीति, बढ़ती हुई इनपुट लागत और ब्याज दरें मिलकर अर्थव्यवस्था की दर को धीमा करेंगे। मुद्रास्फीति की दर 13 फीसदी के स्तर पर बनी रहने के अनुमान हैं। भारतीय रुपया गिरता हुआ एक डॉलर के मुकाबले 43-43.5 के स्तर पर आ जाएगा।

राजनीति का असर:

दुनिया की प्रसिद्ध पत्रिका इकोनॉमिस्ट का आकलन है कि भारत में राजनीतिक अस्थिरता का असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। अगली सरकार भी गठबंधन की ही होगी। क्षेत्रीय दलों का इसमें बड़ा दखल होगा। इसलिए आर्थिक विकास की दर धीमी पड़ेगी और यह 2009 में खिसककर 7.1 फीसदी तक जा सकती है। फिर भी आईटी और आईटी पर आधारित सेवाओं का उद्योग तेजी से विकास करेगा।

स्टील, सीमेंट विस्तार टलेंगे:

औद्योगिक उत्पादन घटने का सीधा अर्थ है कि स्टील और सीमेंट में आने वाली विस्तार परियोजनाएं टलेंगी। परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है और पूंजी बाजार से धन हासिल करना कठिन होता जा रहा है। अतिरिक्त क्षमताओं के विस्तार धीमे पड़ सकते हैं।

डरावनी भविष्यवाणियां

>> सिटीग्रुप: विकास दर 2009 में 7.7 फीसदी और 2010 में 7.9 फीसदी। मुद्रास्फीति 13 फीसदी। रुपया 43-43.5

>> एबीएन एमरो: विकास दर 7.5-7.6 फीसदी

>> अरविंद वीरमनी, सीईए, वित्त मंत्रालय: विकास दर 8 फीसदी

>> द इकोनॉमिस्ट: विकास दर 2009 में 7.1 और 2010 में 7.5 फीसदी

>> गोल्डमैन साक्स: विकास दर 2009 में 7.8

>> जेपी मोर्गन चेज: जीडीपी 2009 में 7 फीसदी और 2010 में 8 फीसदी





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