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हाईकोर्ट पर पंजाब सरकार ने उठाई उंगली

चंडीगढ़.hingh पंजाब सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की उस बेंच पर सवाल उठाए, जिसने विजिलेंस डायरेक्टर सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ फर्जी मुठभेड़ मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

इस याचिका पर सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने सीबीआई जांच और मामले की हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी। साथ ही अदालत ने पंजाब सरकार और सीबीआई को नोटिस भी जारी किए।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट की इस बेंच के आदेश पर सीबीआई सैनी के खिलाफ अपहरण व कई दूसरी धाराओं के तहत केस कर चुकी है। चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन, जस्टिस पी. साथसिवम और जस्टिस जे.एम. पांचाल की बेंच के सामने याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में सैनी को टारगेट बनाया गया है।

वकील ने कहा, ‘हमारे पास कुछ ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जिससे साबित हो जाएगा कि सैनी जैसे वरिष्ठ अफसर के खिलाफ केवल इसलिए आदेश जारी किए गए क्योंकि उन्होंने एक ‘संवेदनशील मामले’ की कुछ समय पहले जांच की थी।’

साल्वे की दलील थी कि इन दस्तावेजों से यह भी साबित हो जाएगा कि हाईकोर्ट बेंच को मामले की सुनवाई ही नहीं करनी चाहिए थी। इसके अलावा 17 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट द्वारा इस तरह के आदेश जारी करने से न केवल आतंकवाद के दौरान लड़ने वाले वरिष्ठ पुलिस अफसर हतोत्साहित होंगे बल्कि पुलिस फोर्स पर भी बुरा असर पड़ेगा। साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट से इन दस्तावेजों को उनकी इच्छा के अनुसार ऑन रिकॉर्ड करने की इजाजत भी मांगी।

हाईकोर्ट ने पिछले साल सौंपी थी सीबीआई को जांच : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पांच अक्टूबर और 10 नवंबर 2007 को सैनी के फर्जी मुठभेड़ करने संबंधी मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों के तहत सीबीआई ने दो जुलाई 2008 को सैनी और अन्य पुलिसवालों के खिलाफ अपहरण व कई अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही उसने हाईकोर्ट में मामले की स्टेट्स रिपोर्ट भी पेश की थी। उसके बाद हाईकोर्ट के जस्टिस महताब सिंह गिल ने सीबीआई से चार माह के भीतर मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

किस आधार पर मांगी रोक
>> मामला सैनी पर हमला करने वाले आरोपियों के गायब होने का था। इस मामले में बलवंत सिंह भुल्लर का नाम नहीं था इसलिए उसकी हत्या को लेकर एफआईआर दर्ज करना सही नहीं है।
>> सीबीआई ने तीन अक्टूबर 2007 को मामले की जांच करने में असमर्थता जताते हुए कहा था कि इस केस में इंटरस्टेट रेमिनफिकेशन नहीं है। पंजाब और चंडीगढ़ के पास अपने प्रशिक्षित स्टाफ और सुविधाएं हैं जबकि सीबीआई पर काम का ज्यादा बोझ है।
>> मौत की सजा पाए आतंकी देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर की याचिका पर हाईकोर्ट..द्वारा मामले की सीबीआई जांच के आदेश देना सही नहीं है क्योंकि भुल्लर ने घटना के बाद 16 साल तक किसी प्रकार की शिकायत नहीं की और अब अचानक हाईकोर्ट से इसकी शिकायत कर दी। भुल्लर ऐसा करके सजा से बचने की कोशिश कर रहा है।

>> दर्शन सिंह मुल्तानी की याचिका पर 1991-92 में मामले की मजिस्ट्रेट लेवल पर जांच हुई थी। उसमें किसी पुलिस अफसर को दोषी नहीं पाया गया।
>> अगर दर्शन सिंह मुल्तानी अपने बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी की मौत कादियां थाने में बताता है तो पंजाब पुलिस को नोटिस देकर जवाब क्यों नहीं मांगा गया?
>> सीबीआई ने एफआईआर मामले की छानबीन और केस की समीक्षा करने के बाद दर्ज नहीं की। इसे महज हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है।

क्या है मामला
17 साल पहले हुई इस मुठभेड़ में एक संदिग्ध आतंकी बलवंत सिंह मुल्तानी मारा गया था। उस समय सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। बाद में बलवंत के पिता, रिटायर्ड आईएएस दर्शन सिंह.. मुल्तानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनका बेटा पुलिस हिरासत से भागा नहीं था बल्कि उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था।

इस मामले में हाईकोर्ट ने पांच अक्टूबर 2007 को सैनी के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश जारी किए थे। उधर पंजाब पुलिस का कहना है कि 1991 में सैनी पर हमला हुआ था जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गए थे और तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसी हमले के बारे में पूछताछ के लिए कुछ लोग हिरासत में लिए गए थे जिनमें बलवंत भी था।

19 दिसंबर 1991 को बलवंत पुलिस कस्टडी से फरार हो गया और बाद में मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस का कहना है कि बलवंत देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर का सहयोगी भी था जिसका नाम ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मनिंदर सिंह बिट्टा पर हुए जानलेवा हमले में सामने आया था। इस हमले में कई लोग मारे गए थे। भुल्लर को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।





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