इंदौर. शिक्षकों को अन्य कार्यो के लिए अटैच नहीं करने का आदेश ही फाइलों में अटैच होकर रह गया है। पूरे जिले में सैकड़ों शिक्षक पढ़ाने के अलावा कई काम कर रहे हैं। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी पीछे नहीं। वहां भी करीब आधा दर्जन शिक्षक अटैच हैं।
आठ महीने पहले शिक्षा मंत्री लक्ष्मणसिंह गौड़ (अब दिवंगत) के निर्देश पर शिक्षकों को अटैचमेंट से मुक्ति मिली थी। अब उनके जिले में ही उस आदेश का मखौल उड़ाया जा रहा है।
जिला निर्वाचन कार्यालय ने एक आदेश में 800 से ज्यादा शिक्षकों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए लगा दिया। जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय में कई शिक्षक अटैच हैं। वहीं दूसरी ओर विभाग कमी की चलते शिक्षकों को उच्च अध्ययन से रोक रहा है।
प्रदेश के शैक्षणिक कैलेंडर के मुताबिक 2007-2008 में सरकारी स्कूल १९क् दिन व 2006-2007 में १८७ दिन लगे थे। इस सत्र में तो कैलेंडर जारी ही नहीं हुआ। हो भी गया तो पढ़ाई के दिन 190 से ज्यादा होंगे इसमें संदेह है।
अटैचमेंट और गैर शैक्षणिक कार्यो से पढ़ाई बाधित होने के कारण ही श्री गौड़ की पहल पर 28 नवंबर 2007 को शिक्षा केंद्र आयुक्त आर.एस. जुलानिया व लोकशिक्षण आयुक्त पी.एन. मिश्रा ने संयुक्त आदेश जारी किया था।
उसमें राज्य शासन के दो नियमों का हवाला देते हुए लिखा था जनगणना व चुनाव की अधिसूचना के बाद ही शिक्षकों को निर्वाचन कार्य में लगाया जा सकता है। इसके विपरीत जिला निर्वाचन अधिकारी ने 15 दिन की ड्यूटी लगाई और चेतावनी भी दी है कि कोई कर्तव्य का पालन नहीं करेगा तो तीन महीने से दो साल के लिए दंडित किया जा सकता है। इसके अलावा जिले में 19 करोड़ की योजनाओं पर इस बार काम होगा।
प्रशासन को जानकारी है >> माया मालवीय, जिला शिक्षाधिकारी
शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन में लगाई है, आपकी जानकारी में है?
हां मेरी और स्थानीय प्रशासन को भी इसकी जानकारी है।
- यह तो नियमों के खिलाफ है?
निर्वाचन कार्य है, फिर भी विभाग के अधिकारियों को आदेश से अवगत करा दिया है।
- आपके कार्यालय में भी शिक्षक अटेच हैं?
शिक्षक एक भी अटैच नहीं है। जो है वे चार्ज सौंपने आए है। दो-तीन दिन में रिलिव हो जाएंगे। लिपिकों के आदेश दिए है। उनके भी स्थानांतरण आदेश होंगे, तभी काम लिया जाएगा। जिले में विभाग के 27 अनुभाग है, ऐसे में काम लेना मुश्किल होता है। कार्यालय में ही सहायक संचालक, साख्यिंकी अधिकारी, पर्सनल असिसटेंट व लेखा अधिकारी का पद खाली है। ऐसे में काम तो करना होगा।
सुरेश यादव, जिला निर्वाचन पर्यवेक्षक
कितने शिक्षकों को ड्यूटी पर लगा रहे हैं?
- कुल 1966 कर्मचारी लगे हैं जिसमें शिक्षक तो 800 हैं।
दूसरा काम नहीं हो सकता फिर भी?
- विभाग को व्यवस्था तो शासन से ही मिलती है, फिर उन्हीं के स्कूलों में वोटर लिस्ट दिखाने के लिए कहा है।
शिक्षा विभाग को इस आदेश की जानकारी नहीं दी?
- आयुक्त और प्रमुख सचिव ने सूची मांगी थी जो भेज दी गई।
स्कूल शिक्षा विभाग ने समय-समय पर अटैचमेंट रोकने के आदेश जारी किए हैं जिनका तात्कालिक रूप से पालन भी होता है। निर्वाचन के नाम पर शिक्षकों को जोता जा रहा है। इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा। इस वस्तुस्थिति से शासन को अवगत कराया जाएगा।
- एस.बी. सिंह, संयुक्त संचालक
इतने दिन तो स्कूल पहुंच ही नहीं पाते शिक्षक
>> आकस्मिक अवकाश ---------------------- 13
>> ऐच्छिक अवकाश ----------------------- 03
>> चिकित्सकीय अवकाश -------------------- 10
>> अर्जित अवकाश ------------------------ 10
>> कलेक्टर द्वारा घोषित अवकाश ---------------- 3
>> शालेय वाषिर्कोत्सव व खेलकूद ----------------5
>> शिक्षक-पालक संघ का गठन व शपथ ---------- 1
>> विभिन्न रैली व कार्यक्रम से प्रभावित ---------- 2
>> सर्व शिक्षा अभियान ---------------------- 3
>> लोकसभा निर्वाचन प्रशिक्षण मतदान, मतगणना --- 6
>> पल्स पोलियो (साल में दो-तीन बार) ---------- 2
>> मतदाता सूची पुनरीक्षण ------------------- 15
>> सर्व शिक्षा अभियान ---------------------- 30
>> गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों का सर्वे --------- 21 दिन
>> नि:शक्त जनों का सर्वेक्षण ------------------- 4
>> योग प्रशिक्षण --------------------------- 5
>> अक्षर संसार कार्यक्रम ---------------------- 2
>> जल संग्रहण सर्वेक्षण ---------------------- 1
>> नि:शक्त छात्र-छात्राओं का मुल्याकंन ------------ 1
>> सी.सी.आर.टी प्रशिक्षण ------------------- 1
आदेश तो ये भी थे : जो शिक्षक-कर्मचारी पदस्थापना स्थल पर काम नहीं कर रहा हो उसे अनुपस्थित मानकर उस अवधि का वेतन भुगतान भी न किया जाए। किसी अधिकारी द्वारा शिक्षक का किसी भी नाम से अटैचमेंट किया जाए तो अवैध है। उसका पालन नहीं किया जाए। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगाना जनशिक्षा अधि. 2002 का उल्लंघन है।
अटैचमेंट विभाग में भी : जिला शिक्षाधिकारी माया मालवीय के कार्यालय में कई शिक्षक अटैच हैं। उनमें- सिरपुर हाईस्कूल में अकाउंटेंट गोपालदास तोलानी जिला शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं। कस्तूरबा स्कूल के राजेश अंबवानी, महू विकासखंड के श्रेणिक जैन, रजत जयंती स्कूल की कृष्णा यादव और उच्च श्रेणी लिपिक जे.के. पांचाल वहीं हैं।
इसलिए बिगड़ता है रिजल्ट
>> 2003-04 में लोकसभा-विस चुनाव के कारण परिणाम में गिरावट आई।
>> हाईस्कूल का परिणाम 2002-03 में 32 प्रतिशत था, जो चुनावी साल में 26.64 रह गया।
>> चुनाव के बाद 2004-05 में 31.55 व 2005-06 में 53 प्रतिशत पहुंचा।
>> 2007-08 के अंतिम 6 महीने में अटैचमेंट खत्म हुआ और शिक्षक पूरी तरह पढ़ाते रहे तो परिणाम 61.67 पर पहुंच गया।
>> इस सत्र में फिर चुनाव हैं। इसका रिजल्ट पर क्या असर पड़ेगा उसकी कल्पना की जा सकती है।
खाली हैं कई पद >>
हायर सेकंडरी प्राचार्य ----------- 4
हाईस्कूल प्राचार्य ------------- 28
उच्च श्रेणी शिक्षक ----------- 362
व्यायाम शिक्षक ------------- 11
सहायक शिक्षक विज्ञान -------- 58
उद्योग शिक्षक -------------- 43
ग्रंथपाल ------------------ 14
प्रधान पाठक माध्यमिक विद्यालय - 163
प्रधान पाठक प्राथमिक विद्यालय -- 174
सहायक शिक्षक ------------- 157
कुल -------------------- 1015
(30 मई तक के आंकड़े। उन्नत हुए स्कूलों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था अलग से होना है)
(सारे आंकड़े संयुक्त संचालक एस.बी. सिंह द्वारा आयुक्त लोक शिक्षण को सौंपी गई रिपोर्ट में बताए गए हैं)