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बस किराए पर टकराव

रायपुर. bus बसों का यात्री किराया 20 प्रतिशत बढ़ाने के बाद सरकार ने पुनर्विचार का ऐलान कर दिया। कांग्रेस विधायक रविंद्र चौबे के विरोध की वजह से परिवहन मंत्री हेमचंद यादव ने ऐलान किया कि सरकार किराया वृद्घि में अंतिम मुहर लगाने के पहले दोबारा विचार करेगी।

कांग्रेस विधायक रविंद्र चौबे ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए किराया बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बस किराए में एक मुश्त 20 प्रतिशत वृद्धि अनुचित है। इससे बसों में यात्रा करने वाले गरीब यात्रियों पर आर्थिक भार पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पता नहीं क्या सोचकर सीधे 20 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सरकार के इस फैसले से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार बस मालिकों के पक्ष में काम कर रही है। परिवहन मंत्री ने इस बात से इंकार किया और अपनी ओर से तर्क दिए।

मंत्री का जवाब सुनने के बाद कांग्रेस विधायक ने कहा कि मुझे तो ऐसा ऐसा लग रहा है कि मैं बस मालिक से बात कर रहा हूं। उसके बाद श्री चौबे ने बस किराया बढ़ाने का आधार पूछा। श्री यादव ने कहा इसका प्रमुख आधार तो यही है कि केंद्र सरकार ने महंगाई बढ़ा दी। अगर इतनी महंगाई नहीं बढ़ाई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

टायर से लेकर बस निर्माण तक सब महंगा हो गया। सरकार ने पांच बार डीजल के रेट बढ़ा दिए। इस कारण बस मालिकों को तकलीफ होने लगी। पहले 100 किलोमीटर बस चलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च आता था लेकिन अब 2500 रुपए खर्च आ रहा है।

जाहिर है, उनकी परेशानी को भी देखना होगा। चार साल से किराया नहीं बढ़ाया गया है। इस कारण सरकार ने किराया बढ़ाने का निर्णय लिया। अंत में श्री चौबे ने किराए की दर कम करने की मांग की। इस पर श्री यादव ने कहा कि किराया वृद्धि की दर पर पुनर्विचार किया जाएगा।

क्यों बढ़ा किराया
बस मालिकों ने 50 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग करते हुए 1 जुलाई से गाड़ियों के चक्के जाम करने की चेतावनी दी थी। आंदोलन शुरु होने के पहले ही सरकार ने बस मालिकों को बुलाकर चर्चा की। दो चरण की वार्ता के बाद बस मालिक और सरकार 20 प्रतिशत किराए पर सहमत हुए। अभी फिलहाल अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इस वजह से नया किराया वसूला नहीं जा रहा है।

बस मालिक खामोश
सरकार के ताजा रुख से बस मालिक सकते में हैं। बस आपरेटरों ने फिलहाल इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। राजधानी बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद दुबे और सचिव भावेश दुबे ने बताया कि सरकार के सामने तर्क रखकर किराया बढ़ाने की मांग की थी। एक बार फैसला हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में अब करार के खिलाफ नहीं जाएगी।





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