HomeNewsChhattisgarhRaipur Raipur

घोटुल वेबसाइट, रमन का पलटवार

रायपुर. सरकारी वेबसाइट के जरिए आदिवासी समाज को अपमानित करने के आरोप पर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने ऐसा करारा जवाब दिया कि कांग्रेसी सन्न रह गए।

नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा तथा विधायक धर्मजीत सिंह, मोहम्मद अकबर, कवासी लखमा, भूपेश बघेल, डा. शक्राजीत नायक, नोबेल वर्मा, गणोशशंकर वाजपेयी, धनेंद्र साहू और रविंद्र चौबे ने शून्यकाल में मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी पर हमला करने वाले अफसर को सरकार प्रश्रय दे रही है।

विधायकों ने मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी वेबसाइट में आदिवासियों की घोटुल संस्कृति को फ्री सेक्स का अड्डा बताया गया है। अबूझमाड़िया के पानी पीने के तरीके की तुलना मवेशियों से की गई है। आदिवासी समाज को सरकार के अफसर ने अपमानित करने का प्रयास किया और सरकार उस अफसर को प्रमोशन देकर कलेक्टर से कमिश्नर बना रही है।

ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस विधायकों ने इस मामले में सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराने का आग्रह किया। कांग्रेस विधायकों के हमले झेलने के बाद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने जोरदार जवाबी हमला किया। उन्होंने रहस्योद्घाटन किया कि इस वेबसाइट का निर्माण हमारी सरकार ने नहीं, बल्कि हमसे पूर्व की कांग्रेस सरकार ने किया है।

यह सुनकर कांग्रेस विधायक खड़े होकर विरोध करने लगे। मुख्यमंत्री ने भी ऊंचे स्वर में कहा कि आप लोगों में सच सुनने की हिम्मत होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन से यह बात उनके ध्यान में आई है और आदिवासियों ने उनसे शिकायत की, उसी दिन से वेबसाइट में आवश्यक सुधार कर दिया गया है।

मामले की जांच करने के लिए सचिव स्तर के अधिकारी बीएल ठाकुर को वहां भेजा गया। आम आदिवासियों से बात करने के अलावा वे क्षेत्र के सांसदों और विधायकों से भी बात करेंगे। सारे पक्षों को सुनने के बाद वे रिपोर्ट देंगे और इस तरह की घटना के लिए जो भी अफसर जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आईपीएस की पदस्थापना पर कोई नीति नहीं
भाजपा विधायक देवजी पटेल के प्रश्न पर गृहमंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि पुलिस विभाग की स्थानांतरण नीति के अनुसार उपपुलिस अधीक्षकों को 3 वर्ष अथवा 54 वर्ष की आयु जो पहले हो उन्हें नक्सली क्षेत्रों में पदस्थ किया जाता है।

सीधी भर्ती के उप पुलिस अधीक्षकों को पांच वर्ष तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थ किया जाता है। श्री नेताम ने बताया कि आईपीएस अफसरों के लिए इस प्रकार की नीति नहीं है लेकिन नए अफसरों को पहले नक्सल क्षेत्रों में ही पदस्थ किया जाता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: