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रेल किराया बढ़ाए बिना काम नहीं

ग्वालियर. महंगाई की मार का असर रेलवे की वित्त व्यवस्था पर पड़ने लगा है। रेलवे के वित्त अधिकारी इसको लेकर चिंतित हैं। उनके तर्क हैं कि यात्री किराए में बढ़ोतरी होनी चाहिए, तभी रेलवे की स्थिति में बेहतर सुधार हो सकता है।

रेलवे बोर्ड की वित्त आयुक्त सुधा चौबे ने स्टेशन के वीआईपी कक्ष में शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि केन्द्र सरकार रेलवे को हर साल राशि आवंटित करती है। वर्ष 2008-09 के लिए रेलवे ने एक हजार करोड़ रुपए मांगे थे लेकिन 750 करोड़ रुपये ही दिये गए।

पिछले चार सालों से रेलवे ने यात्री किराए में बढ़ोतरी नहीं की है। ऊपर से महंगाई के बढ़ने व छठवें वेतन आयोग के कारण रेलवे की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। रेलवे ने इसके लिए साढ़े चार हजार करोड़ रुपए का बजट अलग से सुरक्षित रख लिया है।

पे-कमीशन लागू होते ही इसे रेल कर्मियों को दे दिया जाएगा। रेलवे की हालत देखी जाए तो अब यात्री किराए में बढ़ोतरी होना वाजिब है, परन्तु राजनीतिक दृष्टि ठीक इसके विपरीत रहती है। रेलवे का बजट फायदेमंद होने के बाद अब हर किसी की रेलवे से अपेक्षाएं ज्यादा बढ़ गई हैं।

घाटा देख अटका नैरोगेज का परिवर्तन
रेलवे ने ग्वालियर-श्योपुरकलां नैरोगेज रेल मार्ग को ब्राडगेज में बदलने के लिए सर्वे करा लिया है। रेलवे 14 फीसदी तक घाटा सहन कर सकती है लेकिन यह घाटा 18 प्रतिशत तक हो रहा है। भविष्य में उस क्षेत्र का विकास भी होता दिखाई नहीं देता। यदि आदिवासी क्षेत्र के लोगों को बड़ी रेल का फायदा दिलाने के लिए कोई पावरफुल जनप्रतिनिधि आगे आए तो रेलवे उक्त प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे सकती है।

पार्सल से नहीं गुड्स से ज्यादा फायदा
रेलवे को पार्सल से ज्यादा गुड्स ट्रैफिक से फायदा होता है। फायदा उठाने के लिए रेलवे जहां जैसा मार्केट होता है, वैसा टैरिफ को कम-ज्यादा करती है। इससे व्यापारियों को भी लाभ मिलता है। रेलवे की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए कई योजनाएं भी बनाई गई हैं। उनका कमर्शियल उपयोग किया जाएगा। गोले का मंदिर की जमीन को देख योजना बनाई जाएगी।

छठवें वेतन आयोग में समानता नहीं
देश में रेलवे की पहली महिला महाप्रबंधक रह चुकीं व छठवें वेतन आयोग की समीक्षा समिति की सदस्य श्रीमती चौबे ने बताया कि रिपोर्ट में चतुर्थ श्रेणी के पद ही नहीं रखे गए। तृतीय श्रेणी में योग्यता दसवीं व आईटीआई रखी गई है। यह रेलवे के लिए मुमकिन नहीं है। हमारे यहां चतुर्थ श्रेणी का काम ज्यादा है। उनकी योग्यता भी आठवीं है। रिपोर्ट में तृतीय श्रेणी व उच्च अधिकारियों के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है, जो गलत है। आयोग के लिए सचिव स्तर की कमेटी बन चुकी है। उसकी बैठक होने के बाद आई रिपोर्ट को सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा।

मोतीझील के बारे में रिपोर्ट मुख्यालय भेजी
मंडल रेल प्रबंधक झांसी पंकज कुमार ने बताया कि मोतीझील स्टेशन से छोटी ट्रेन चलाए जाने के संबंध में सर्वे कराकर रिपोर्ट जोन मुख्यालय इलाहाबाद भेज दी गई है। उसमें शहरवासियों के अलावा यात्रियों की समस्याएं भी बताई गई हैं क्योंकि वहां से ट्रेन चलाने पर रेलवे का खर्चा तो होगा ही, साथ ही यात्रियों को वहां पहुंचने में दिक्कतें आएंगी।





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