मुंबई/नई दिल्ली.
भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊंची मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन के कमजोर आंकड़ों ने वामपंथियों की समर्थन वापसी से पैदा हुए उत्साह पर पानी फेर दिया। मुद्रास्फीति के 11.89 फीसदी पर पहुंचते ही बीएसई सेंसेक्स में गिरावट शुरू हो गई और 456 अंक के घाटे पर बंद हुआ।
औद्योगिक उत्पादन की दर भी मई 2008 में 3.8 फीसदी रह गई है, जो एक साल पहले 10.6 फीसदी थी। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद वीरमनी की राय है कि औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े चिंता का विषय है। वित्त मंत्रालय को 2009 के विकास दर का आंकड़ा 8 फीसदी पर खिसकाना पड़ सकता है।
बढ़ानी पड़ेंगी दरें : सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद मुद्रास्फीति दर नियंत्रण में नहीं आने पर रिजर्व बैंक को दरें बढ़ानी पड़ सकती है।
वित्त मंत्रालय का मानना है कि खाद्यान्न, दालों, खाद्य तेल, सब्जियों, डेरी उत्पादों और केरोसीन, साबुन, माचिस आदि की कीमतें स्थिर हो गई हैं। रिजर्व बैंक को एक बार फिर रेपो दरों व सीआरआर में 0.25-0.50 फीसदी तक इजाफा करना पड़ सकता है।
अगर थोक मूल्य सूचकांक में इसी तरह वृद्धि होती रही तो रिजर्व बैंक फिर कर्ज की ब्याज दरें (रेपो) बढ़ानी पड़ सकती हैं।
—क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज
ऊंची मुद्रास्फीति और धीमे औद्योगिक उत्पादन के कारण नीति निर्माताओं के सामने काफी दुविधा पैदा हो गई है। रिजर्व बैंक जुलाई के बाद दरें बढ़ा सकता है।
—शुभदा राव, चीफ इकानामिस्ट, येस बैंक
रिजर्व बैंक रेपो दरों में 0.25 फीसदी और सीआरआर में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है।
—डीके जोशी, मुख्य अर्थशास्त्री, क्रिसिल
किसने बढ़ाई मुद्रास्फीति?
खोपरा तेल 11
सरसों तेल 05
सोया तेल 04
अरंडी तेल 04
सूरजमुखी तेल 05
कॉटन यार्न 09
पालिस्टर फाइबर 08
फल सब्जी 01
जुवार 01
दालें 01
सीमेंट 01
खाद्य तेल 02
तंबाकू 02
धीमे हो रहे उद्योग
उत्पादन ------- मई 08 --- मई07
आईआईपी ------ 3.8 ---- 10.6
मैन्युफैक्चरिंग ---- 3.9 ---- 11.3
कैपिटल गुड्स ---- 2.5 ---- 22.4
कंज्यूमर ड्यूरेबल -- 4.4
नान ड्यूरेबल ----- 8.1
उद्योग : 3.8 फीसदी पर आ गया है मई में औद्योगिक उत्पादन का इंडेक्स (आईआईपी), जो एक साल पहले 10.6 फीसदी पर था।
क्या कारण : ऊंची ब्याज दरों के कारण कंज्यूमर ड्यरेबल की मांग घटी। मैन्युफैक्चरिंग की दर 3.9 फीसदी रह गई।
क्या होगा असर : सरकार को विकास दर का आंकड़ा घटाकर 8 फीसदी करना होगा। सरकार का राजस्व घटेगा।
मुद्रास्फीति : 11.89 फीसदी पर मुद्रास्फीति का आंकड़ा 28 जून को खत्म सप्ताह में आ गया। एक सप्ताह पहले यह 11.63 फीसदी था।
आसमान छूते दाम : खोपरा तेल, सरसों तेल, सोया आयल और फल व सब्जियों की कीमतें बढ़ीं।
और बढ़ने की आशंका : रिजर्व बैंक 29 जुलाई को मौद्रिक समीक्षा में दरें बढ़ा सकता है।
शेयर मार्केट : 456.39 अंक के घाटे से सेंसेक्स 13,469.85 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 113.2 के घाटे से 4049 पर बंद हुआ।
निराशा का आलम : औद्योगिक उत्पादन घटने, मुद्रास्फीति बढ़ने व इंफोसिस के अनुमान बदलने से निराशा।
नुकसान बढ़ेगा : बाजार छह सात माह में 14,500 के आसपास रहना चाहिए। अगर विंडफाल टैक्स या क्रूड आयल में ज्यादा इजाफा होता है तो 12000 तक जा सकता है।