लंदन. भारतीय व्यवसायी सुभाष चंद्रा की इंडियन क्रिकेट लीग ने धमकी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उसकी उपेक्षा जारी रखी तो वह उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।
आईसीसी ने अब तक इस बागी भारतीय लीग को मान्यता नहीं दी है जिससे कई देशों ने आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में लेने और घरेलू क्रिकेट में खेलने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया है।
इसके अलावा आईसीएल को भारत में स्टेडियमों के इस्तेमाल की इजाजत भी नहीं दी जा रही है। आईसीएल के सूत्नों का कहना है कि आईसीसी के रवैये से लीग बुरी तरह प्रभावित हुई है और उसके लिए अपने अस्तित्व को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। आईसीसी के रवैये से खिन्न आईसीएल अब उसके खिलाफ लंदन हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर रही है। उसका तर्क है कि आईसीसी ने उसे मान्यता नहीं दी है इसलिए उसके खिलाफ भेदभाव हो रहा है।
आईसीसी ने गठित की समिति
सहित गैर मान्यता प्राप्त टूर्नामेंटों के विवादित मुद्दे को सुलझाने के लिए एक उच्चधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। खेल वेबसाइट क्रिकइंफो ने आईसीसी के एक प्रवक्ता के बयान को उजागर करते हुए कहा कि समिति के गठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेल के हितों को ध्यान में रखकर किसी निर्णय पर पहुंचा जाए।
आईसीसी की पिछले सप्ताह यहां संपन्न वाíषक बैठक में समिति के गठन को अंतिम रूप दिया गया। इसमें इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष गाइल्स क्लार्क, क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के अध्यक्ष नोर्मन एरेंडसे, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के भावी अध्यक्ष शशांक मनोहर और उपाध्यक्ष ललित मोदी तथा आईसीसी के वरिष्ठ कानूनी सलाहकार डेविड बेकर शामिल हैं।
आईसीसी की वाíषक बैठक के दौरान बागी भारतीय लीग आईसीएल और उसकी मान्यता पर अलग से विचार हुआ था। उल्लेखनीय है कि भारत,ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को अपने यहां घरेलू लीग में खेलने की अनुमति नहीं देंगे। लेकिन इंग्लैंड इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति में है। आईसीएल से जु़ड़े २५ खिलाड़ी इस समय १५ इंग्लिश काउंटियों की ओर से खेल रहे हैं।