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इनकम टैक्स रिटर्न इतना भी मुश्किल नहीं

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की बात सुनते ही दीपक ठाुकर के माथे पर बल पड़ गए हैं। वे पढ़े-लिखे हैं, एक कंपनी में अधिकारी हैं, लेकिन रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते। दीपक ऐसे अकेले नहीं हैं, जो अपना रिटर्न खुद दाखिल नहीं कर पाते हैं।

दीपक जैसे लोगों के लिए यह बेहद कठिन काम है। उन्हें लगता है कि वे इसे नहीं कर सकते। अगर कुछ व्यावहारिक बातों पर ध्यान दिया जाए तो इनकम टैक्स रिटर्न भरने का काम आसान बनाया जा सकता है। इसके लिए आपको कदम-दर-कदम आगे बढ़ना होगा। हम यहां दीपक को बताएंगे कि कैसे वे आसानी से अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

चलिए 4 कदम..

कदम 1 :

रिटर्न दाखिल करने के लिए अलग-अलग वर्ग के आयकरदाताओं के लिए अलग-अलग फार्म निर्धारित किए गए हैं। ऐसे कुल आठ फार्म हैं। इसलिए सबसे पहले तो आपको यह तय करना होगा कि आप किस वर्ग में आते हैं और उसके अनुरूप आपको कौन-सा फार्म चुनना है। उदाहरण के लिए अगर आपकी आय वेतन, पेंशन, परिवार पेंशन या ब्याज से हो रही है, तो आपको फार्म नंबर 1 का चयन करना होगा। इसी प्रकार अन्य लोगों को संबंधित फार्म चुनने होंगे।

कदम 2 :

एक बार फार्म का चयन करने के बाद बारी है अलग-अलग मद में होने वाली आय की गणना करने की। यानी वेतन, सम्पत्ति से होने वाली आय, पूंजीगत लाभ, किसी व्यापार या पेशे से होने वाली आय, अन्य स्रोतों जैसे ब्याज इत्यादि से होने वाली आय आदि की गणना कर लें। वित्त वर्ष 2007-08 में अर्जित की गई सारी आय आपको अपने रिटर्न में दर्शानी होगी।

कदम 3 :

अब बारी है कुल करयोग्य आय पर टैक्स गणना की। अगर व्यक्तिगत करदाता की कुल वार्षिक आय 10 लाख रुपए से ज्यादा है तो उसे 10 फीसदी का सरचार्ज भी जोड़ना होगा। साथ ही दो प्रकार के शिक्षा उपकर का भी भुगतान करना होगा। अगर आपने अग्रिम कर का भुगतान नहीं किया है तो भुगतान किए जाने वाले टैक्स में दंड के रूप में ब्याज (पीनल इंटरेस्ट) को जोड़ना नहीं भुलिएगा। याद रखिए रिटर्न दाखिल करने से पहले आपकी गणना के अनुरूप स्व-आकलित टैक्स का भुगतान दंडनीय ब्याज के साथ जरूर कर दें।

कदम 4 :

फार्म भरने के बाद अंतिम कार्य उसे आयकर विभाग में जमा करने का बचा रह जाता है। इसे तीन तरीके से जमा करवाया जा सकता है। एक, इसे आप सीधे पेपर रूप में विभाग के कार्यालय में जाकर जमा करवा सकते हैं। दो, आप अपने डिजिटल हस्ताक्षर के साथ इंटरनेट के जरिये भी अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं और तीन, अगर आपके पास डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा नहीं है तो आप अपने रिटर्न फार्म को इंटरनेट के जरिये भेजकर उसकी एक प्रति अपने हस्ताक्षर के साथ विभाग में जमा करवा सकते हैं।

बताएं वित्तीय लेन-देन

फार्म में निवेश और वित्तीय लेन-देन की जानकारी अनिवार्य रूप से दें। इस जानकारी को सालाना सूचना रिटर्न (एआईआर) नाम दिया गया है। कुल आठ मामलों में जानकारी देनी जरूरी है। बचत खाते में दस लाख रुपए या उससे ज्यादा राशि जमा करना, साल में दो लाख रुपए या उससे ज्यादा राशि का क्रेडिट कार्ड के जरिये भुगतान करना, तीस लाख रुपए की संपत्ति खरीदना, साल में दो लाख रुपए या उससे ज्यादा की म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीदना, रिजर्व बैंक के पांच लाख रुपए या उससे ज्यादा के बांड खरीदना, एक लाख रुपए या उससे ज्यादा की रकम आईपीओ या राइट इश्यू में लगाना और बांड या डिबेंचर में पांच लाख रुपए या उससे ज्यादा राशि का निवेश करना ऐसे ही मामले हैं जिनकी जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी। इसमें आयकरदाताओं को यह सुविधा जरूर प्रदान की गई है कि रिटर्न फार्म के साथ कोई भी कागजात नत्थी नहीं करना पड़ेगा।

याद रखें 4 बातें

कई वेतनभोगियों को लगता है कि उनकी आय का अन्य कोई स्रोत नहीं है और वेतन से प्राप्त आय के स्रोत पर ही उनका टैक्स काट लिया गया है तो ऐसी स्थिति में उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसा सोचना गलत है। उन सभी वेतनभोगियों के लिए भी रिटर्न भरना अनिवार्य है जिनका टैक्स स्रोत से ही काट लिया गया है। याद रखें कि रिटर्न दाखिल नहीं करने पर आयकर विभाग आप पर दंड भी लगा सकता है।

कुल करयोग्य आय छूट सीमा से नीचे, लेकिन कुल आय इस सीमा से अधिक है तो रिटर्न दाखिल करना होगा। उदाहरण के लिए 31 मार्च 2008 को समाप्त वित्त वर्ष में ‘अ’ नामक व्यक्ति की कुल आय एक लाख 50 हजार रुपए है। उसने इंश्योरेंस प्रीमियम के रूप में 50 हजार रुपए का भुगतान किया है तो ऐसे में उसकी करयोग्य आय एक लाख रुपए हो जाएगी। यह राशि वित्त वर्ष 2007-08 के लिए छूट सीमा एक लाख 10 हजार रुपए से काफी कम है, लेकिन फिर भी उसे रिटर्न दाखिल करना होगा क्योंकि उसकी कुल आय छूट सीमा से अधिक है।

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 64 के तहत जीवन-साथी और नाबालिग संतान की आय भी आयकरदाता की आय में ही शामिल की जाती है। भले ही आपने अपनी पत्नी को उपहार दिया हो, उससे अर्जित आय भी आपकी आय में ही क्लब की जाएगी। तो रिटर्न दाखिल करते समय इस पहलू पर भी ध्यान देना जरूरी है।

किसी वेतनभोगी का अपना कोई व्यवसाय भी है और उसे उस व्यवसाय में नुकसान हुआ है, तो वह इस नुकसान को अपने वेतन में कटौती के रूप में नहीं दर्शा सकता। इसलिए ऐसे लोगों को रिटर्न दाखिल करते समय इस कटौती का दावा करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है..

अधिकांश व्यक्तिगत करदाताओं चाहे वह नौकरीपेशा हो या व्यापारी या फिर संपत्ति से आय हासिल करने वाले अथवा पेंशन प्राप्तकर्ता, के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। केवल उन लोगों को 30 सितंबर तक रिटर्न दाखिल करने की छूट है जिनके लिए अपने एकाउंट की आडिटिंग करवानी जरूरी है।

इनकम टैक्स रिटर्न फार्म में अपने बैंक एकाउंट की जानकारी बहुत ध्यान व सतर्कता से भरें। एकांउट से संबंधित पर्याप्त और सही जानकारी देने पर आप जल्दी रिफंड हासिल कर सकते हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न फार्म भरते समय आपको न तो आय गणना का कोई दस्तावेज लगाना है और न ही बैलेंस सीट। रिटर्न फार्म की प्रक्रिया दस्तावेज विहीन बनाई गई है।

किसके लिए कौन-सा फार्म

फार्म संख्या किस पर लागू

आईटीआर 1 व्यक्तिगत आयकरदाता जिनकी आय वेतन, पेंशन, परिवार पेंशन या ब्याज से होती है

आईटीआर 2 जिन व्यक्तिगत आयकरदाताओं या एचयूएफ की आय व्यवसाय या पेशे से नहीं होती है

आईटीआर 3 जो व्यक्तिगत आयकरदाता या एचयूएफ किसी फर्म में भागीदार हो और किसी भी प्रोप्राइटरशिप में व्यवसाय या प्रोफेशन नहीं करते हो।

आईटीआर 4 जिन व्यक्तिगत आयकरदाताओं और एचयूएफ की आय प्रोप्राइटरी व्यवसाय से हो

आईटीआर 5 फर्म, लोगों का संगठन और व्यक्तियों का समूह

आईटीआर 6 छूट का दावा करने वाली कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियां

आईटीआर 7 सेक्शन 139(4ए), 139 (4बी), 139 (4सी) या 139 (4डी) में रिटर्न दाखिल करने वाले।

आईटीआर 8 फ्रिंज बेनिफिट टैक्स के रिटर्न

:: ऐसे पाएं फार्म::

www.incometaxindia.gov.in अगर आयकर विभाग के कार्यालयों में रिटर्न फार्म नहीं मिल रहा है तो उसे इस वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

(लेखक जाने-माने निवेश एवं कर सलाहकार हैं।)





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