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दो डोनर गिरफ्तार

उज्जैन.बहुचर्चित किडनी प्रत्यारोपण मामले में फर्जी नाम से गुर्दा देने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है। उज्जैन पुलिस एक डोनर को अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लाई है तो दूसरा उज्जैन से पकड़ा गया है। दोनों के खिलाफ फिलहाल फर्जी नाम, पते दर्ज कराने के कारण धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

गुजरात से पकड़े गए किडनी डोनर का नाम परेश पिता दुल्लभपुरी गोस्वामी (४२) निवासी ५६, चंद्र सोसायटी ओडव (अहमदाबाद) है। वह वेल्डिंग का काम करता है और उसने किडनी प्रत्यारोपण सरगना विनोद पटेल के बहकावे में आकर गिरीश सोनी के माध्यम से खुद की किडनी बेची थी। किडनी का प्रत्यारोपण अहमदाबाद के निजी अस्पताल में ही किया गया था। इधर उज्जैन स्थित विष्णुपुरा से गिरफ्तार किए गए डोनर का नाम राजेश बिठोलिया है। इसने भी अहमदाबाद के उसी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपित करवाई थी जहां परेश ने करवाई थी। यह किडनी राजेश ने इंदौर स्थित बाणगंगा निवासी जगदीश पिता धन्नालाल धर्मे बनकर दी थी। हालांकि पुलिस इसे पहले दिन ही मीडिया के सामने प्रस्तुत कर चुकी थी लेकिन तब इसे आरोपी नहीं बनाया गया था।

सरगना कल होंगे न्यायालय में पेश: किडनी प्रत्यारोपण मामले में रिमांड पर चल रहे सरगना राजेंद्र नागर, राजेश सेन निवासी उज्जैन, राजेश सेन निवासी भोपाल व दिलीप चव्हाण निवासी इंदौर सहित गुजरात के गिरीश सोनी और विनोद पटेल को महाकाल पुलिस सोमवार को न्यायालय में प्रस्तुत करेगी।

महिला को दी

परेश ने पुलिस को बताया है कि उसकी किडनी पंजाब की एक महिला को प्रत्यारोपित की गई। उसने किडनी महिला का भाई दीपक बत्रा बनकर दी थी।

लेने वाले से लिए 2.50लाख, डोनर को दिए ९क् हजारसूत्रों के मुताबिक परेश के किडनी प्रत्यारोपण के मामले में गुजरात के मुख्य सरगना विनोद पटेल और गिरीश सोनी ने लेने वाली महिला से ढाई लाख रुपए लिए थे लेकिन उन्होंने डोनर परेश को सिर्फ ९क् हजार रुपए ही दिए । इसी प्रकार उज्जैन के डोनर राजेश बिठोलिया को किडनी प्रत्यारोपण करने के मात्र ६क् हजार रुपए मिले थे।

कर्ज ने मजबूर किया था

सूत्रों के मुताबिक परेश ने पुलिस के समक्ष कबूला है कि कर्ज के चलते वह किडनी बेचने के लिए मजबूर हुआ था। उसके दो बच्चे पुत्र जयमीन और पुत्री ध्रुवी गोस्वामी है। जयमीन ११वीं में और ध्रुवी बीकॉम प्रथम वर्ष में पढ़ती है। दोनों की पढ़ाई के लिए उस पर ३क् हजार रुपए कर्ज चढ़ गया था। ब्याज के लिए सूदखोर हर माह धमकाते थे। परेशानी के दौरान ही विनोद पटेल उसे मिला था। उसके बहकावे में आकर ही उसने यह कृत्य किया।

किडनी प्रत्यारोपण मामले में डोनर भी आरोपी बनेंगे क्योंकि किडनी सिर्फ दान की जाती है न कि उसे बेचा जाता है लेकिन इस मामले में न सिर्फ किडनी को बेचा गया बल्कि छद्म नाम, पते और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग भी किया गया।

अरविंद तिवारी, कोतवाली सीएसपी





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