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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. 19 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे स्वास्थ्यकर्मी शनिवार को काम पर लौट आए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों एवं नर्सेज के काम पर लौटने से मरीजों की भी जान में जान आ गई है। ऐसा इसलिए कि हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई थीं और मरीज परेशान हो गए थे।
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव अंचल के सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला। कोलारस, बदरवास, पोहरी, बैराड़, पिछोर, मनपुरा, करैरा, दिनारा, नरवर, मगरौनी, खनियांधाना, सतनवाड़ा, भौंती और लुकवासा के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थीं।
हड़ताल से प्रभावित तो जिला अस्पताल भी हुआ, लेकिन यहां पर सैन्य अस्पतालों के स्टाफ और ट्रेनीज नर्सेज की सेवाएं लेने से काफी हद तक व्यवस्था बनी रही। यदि हड़ताल लम्बी चलती तो जिला अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ देती ।
विदित हो कि ब्रम्हस्वरूप समिति की अनुशंसाएं लागू करने सहित अन्य 19 मांगों को लेकर स्वास्थ्यकर्मी मप्र स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर गत आठ जुलाई से मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर हड़ताल पर चले गए थे।
दो दिन बाद दस जुलाई से शिवपुरी जिले के स्वास्थ्यकर्मी भी कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन देने के बाद हड़ताल में शामिल हो गए। हड़ताल में सफाई कर्मियों और नर्सेस स्टाफ के शामिल होने से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लड़खड़ा गईं। हड़ताल समाप्त करने के पीछे स्वास्थ्य कमियों का कहना है कि शासन ने उनकी सभी मांगे मान ली हैं।
सरकार मुकरी तो फिर हड़ताल
मप्र स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष ड डी दीक्षित का कहना है कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्यकमियों की मांगों को 15 दिन में पूरा करने का भरोसा दिया है। श्री दीक्षित का कहना है कि यदि राज्य सरकार अपने वादे से मुकरती है, तो स्वास्थ्य कर्मी एक बार फिर हड़ताल के लिए बाध्य होंगे।