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Raipur Raipur भिलाईएक नई तकनीक की बदौलत बांझ गायें न सिर्फ सामान्य से अधिक दूध दे सकेंगी बल्कि आठ से पंद्रह बछड़ों को जन्म देने योग्य भी हो जाएंगी।
इंडक्शन ऑफ लेक्टेशन नामक इस तकनीक का इस्तेमाल एक बार ही करना पड़ता है। इसके बाद बांझ गायें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करती रहेंगी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) द्वारा प्रायोजित इस परियोजना पर डॉ. जावेद खान ने लगातार तीन साल तक शोध किया है। उन्होंने बताया कि साहीवाल नस्ल की 40 बांझ गायों पर इंडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इनमें से 36 गायें दूध देने लगीं और 34 गायें बाद में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर बछड़ों को जन्म देने लगीं।
दूध पर हार्मोस का असर नहीं
डॉ. खान ने अपने शोध के दौरान हार्मोस के जरिए गर्भवती हुई गाय के दूध और सामान्य गायों के दूध में मौजूद तत्वों का भी परीक्षण किया और पाया कि इसमें हार्मोंस का असर नहीं होता है।
क्या है यह तकनीक? इंडक्शन ऑफ लेक्टेशन एक हार्मोन संबंधी तकनीक है। इसमें सबसे पहले गायों के बांझ होने के कारणों का परीक्षण किया जाता है। यह देखा जाता है कि गाय की बच्चेदानी में इंफेक्शन अथवा अंडाशय में सिस्ट तो नहीं है। उसके बाद प्रजनन संबंधी अनियमितता को ठीक करने के लिए हार्मोन का इजेक्शन लगाया जाता है।
ई-2 और पी-4 का यह डोज एक अनुपात दो में दिया जाता है। इंजेक्शन बांझ गाय की गर्दन में सात दिन तक सुबह और शाम 12 घंटे के अंतराल से दिए जाते हैं। जरूरी देखभाल के बाद गाय के थन में दूध बनने लगता है। इसमें 1200 से 1400 रुपए का खर्च आता है। इस तकनीक की बदौलत साहीवाल नस्ल की गायें रोज तीन से दस और क्रास बीड गायें पांच से पंद्रह लीटर दूध दे सकती हैं।