इंदौर. नगर निगम ऐसी कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था लागू करने की कोशिश में है जिसमें बंद स्ट्रीट लाइट का पता अपने आप चल जाएगा। ऐसा हुआ तो गलियों-कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट महीनों बंद नहीं रहेंगी। अभी तो इसकी शिकायत निगम को करने के बाद लम्बा इंतजार करना पड़ता है। निगम को उम्मीद है नया सिस्टम आकार लेने पर 95 प्रतिशत लाइट चालू रह सकेंगी।
जानकारों के मुताबिक इसके लिए ग्लोबल इन्फर्मेशन सिस्टम ऑफ मॉनीटरिंग (जीआईएसएम) स्थापित किया जाएगा, जो पूरी तरह कम्प्यूटर और चिप आधारित रहेगा। नगर निगम एनर्जी सेविंग का काम जिस कंपनी को सौंपेगा उसे ही यह सिस्टम भी विकसित करना होगा। इसमें एक चिप विभिन्न क्षेत्रों में लगे निगम के स्विचिंग पॉइंट पर होगी।
उससे कंपनी के कंट्रोल रूम, सिटी इंजीनियर, क्षेत्रीय उपयंत्री और कांट्रेक्टर के मोबाइल पर बिजली खपत के दबाव का डाटा और सिग्नल मिलेंगे। खपत कम या ज्यादा होने पर संबंधितों को अपडेट भी किया जाएगा। चिप से ही पता लगेगा किस इलाके की स्ट्रीट लाइट गड़बड़ है।
कंट्रोल रूम और टोल फ्री नंबर भी
सिस्टम में कंपनी जो कंट्रोल रूम बनाएगी उसमें दो टेलीफोन नंबर टोल फ्री होंगे। ताकि लोग 24 घंटे मुफ्त में शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। निगम द्वारा तय शर्तो में शिकायतों और खराबी समय सीमा में नहीं सुधारने पर कंपनी पर आर्थिक दंड किया जाएगा।
बारिश में बंद रहती हैं 30 फीसदी
शहर में 20 फीसदी स्ट्रीट लाइट तो सालभर बंद रहती हैं जबकि बरसात में आंकड़ा 30 फीसदी तक पहुंच जाता है। जानकारों के मुताबिक बारिश में कंडक्टर वायर पर कार्बन जमने से ऐसा होता है।
दीपावली से पहले निगम प्रयास करता है 98 प्रतिशत स्ट्रीट लाइट चालू हो जाए। अभी निगम इसके लिए करीब 50 लाख रुपए महीना खर्च कर रहा है। एनर्जी सेविंग लाइट लगाने, पुराने फिटिंग बदलने और इनके रखरखाव के लिए बुलाए टेंडर में तीन कंपनियों ने रुचि ली है। न्यूनतम 31.90 लाख रुपए मासिक का टेंडर एशियन इलेक्ट्रॉनिक्स, नई दिल्ली का है जिसे महापौर परिषद मंजूरी देगी।