इंदौर.
मास्टर प्लान-2021 भले ही 1 जनवरी से लागू हो गया हो उस पर आपत्तियां आने का सिलसिला जारी है। हाई कोर्ट के आदेश पर आवास एवं पर्यावरण विभाग फिर आपत्तियां ले रहा है। इस बार भी ढाई सौ से ज्यादा आपत्तियां पहुंची हैं। ये सभी जमीन मालिकों ने भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर लगाई हैं।
हाईकोर्ट ने जून में आपत्तियां दर्ज करने के लिए 30 दिन तय किए थे। उसकी अंतिम तारीख चार जुलाई थी। सबसे ज्यादा आपत्तियां कैलोद कर्ताल और मालीखेड़ी को लेकर आईं। ढाई सौ में से 184 आपत्तियां शहर के बाहर की हैं, जिनमें प्रस्तावित प्लान में दर्शाया भू-उपयोग लागू हुए प्लान में बदल दिया गया है। ऐसे जमीन मालिकों के एडवोकेट जय हार्डिया के मुताबिक आपत्तियां आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को भेज दी हैं। मालीखेड़ा में प्रस्तावित प्लान में अधिकारियों ने मौके पर आवास देखकर ही आवासीय प्रस्तावित किया था जबकि लागू प्लान में कृषि भूमि कर दिया गया।
कैलोद करताल पर प्रस्तावित प्लान में आवासीय दिखाया था और लागू किया तो ग्रीन बेल्ट और क्षेत्रीय उद्यान दिखा दिया। नक्शे में जो बढ़ा हुआ ग्रीन बेल्ट दिखाया गया है उसमें बिलावली, पीपल्याराव, अहिरखेड़ी, फतनखेड़ी और कैलोद-करताल शामिल है। ये गांव शहर के दो ही क्षेत्रों में है। बाकी शहर में ग्रीन बेल्ट नहीं दिखाया गया। बड़िया कीमा गांव की 35 आपत्तियां आवासीय क्षेत्र को कृषि दर्शाने को लेकर हैं।
60 फीट की सड़क 100 की हो गई
बायपास से निपानिया सड़क के लिए भी कई आपत्तियां हैं। तुलसीनगर से लगे इस क्षेत्र के लिए सरस्वती और उमंग गृह निर्माण सहकारी संस्था ने आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। दोनों की ओर से कहा गया है सड़क प्लान में 60 फीट थी, बाद में १क्क् फीट कर दी गई। कॉलोनी का नक्शा भी 60 फीट के आधार पर संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय ने स्वीकृत किया है। इससे 100 से अधिक परिवार प्रभावित होंगे। उमंग गृह निर्माण सहकारी संस्था ने तो सभी विभागों से अनुमति भी ली है। इसी सड़क पर समर पार्क, अमृत पैलेस, श्रीनाथ पैलेस, गोयल रिसोर्ट, आशीर्वाद विला भी है।
बर्फानीनगर और धाम सार्वजनिक उपयोग
तुलसीराम रघुवंशी की आपत्ति है ग्राम खजराना के बर्फानीधाम और बर्फानीनगर को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए दिखाया गया है, जबकि यहां ९क् प्रतिशत जमीन पर मकान बन चुके हैं।
850 आपत्तियां सुनने के बाद भी गलती
प्लान के प्रारूप पर साढ़े आठ सौ दावे-आपत्तियां लगी थीं जिनकी सुनवाई व निराकरण इंदौर में समिति के समक्ष और भोपाल में भी विभिन्न स्तर पर हुआ। इसके बाद भी कोर्ट के आदेश पर आपत्तियां बुलाईं तो 250 से ज्यादा जमीन मालिक सामने आए।
क्यों आई आपत्तियां
प्लान लागू करने को लेकर आरोपों से घिरी सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के चलते धारा १९(२) के तहत आपत्तियां सुनने के बजाय ९(५) में प्लान लागू कर दिया। इस पर १८ से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में दर्ज हुई। तब कोर्ट द्वारा शासन को ४ जुलाई तक आपत्तियां लेने और 30 सितंबर तक निराकरण करने के लिए कहा गया।