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कोर्ट का समय बर्बाद करने पर जुर्माना

चंडीगढ़. चंडीगढ़ क्लब में छोटे-मोटे विवाद पर अदालत का दरवाजा खटखटाना कोई नई बात नहीं है। इस बार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने क्लब मेंबर्स के इस रवैये पर सख्ती दिखाई है।

नौ मेंबर्स की तरफ से दायर याचिका को डिसमिस करने के साथ ही उन्हें दो हफ्तों के अंदर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लायर्स वेलफेयर फंड में 20 हजार रुपये बतौर जुर्माना जमा कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि दो हफ्ते बीतने के बावजूद याचिका दायर करने वाले मेंबर्स ने जुर्माना राशि जमा नहीं की है।

राजीव क्वात्रा ने वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर क्लब पदाधिकारियों के चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी शिकायत थी कि एग्जीक्यूटिव मेंबर्स ने मेंबरशिप देने में घपलेबाजी की है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी। उस समय 5000 मेंबर्स के साथ ही करीब 1500 मेंबर्स ने अलग-अलग बॉक्स में वोट डाले थे।

हाईकोर्ट ने यह मामला कंपनी लॉ बोर्ड को रेफर कर दिया था। चुनाव के दो-तीन माह बाद रिजल्ट घोषित कर दिया गया था। नए पदाधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद पीटिशनर राजीव क्वात्रा ने याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद नौ अन्य मेंबर्स ने अदालत में एप्लिकेशन दी थी कि राजीव कवात्रा ने याचिका वापस लेते वक्त उनसे सलाह-मश्विरा नहीं किया, जबकि इस मामले में वह भी पार्टी हैं। जस्टीस प्रमोद कोहली ने 19 मई 2008 को इस पीटिशन को बेबुनियाद बताते हुए कैंसिल कर दिया और कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए 20 हजार रुपये जुर्माना किया। दो हफ्ते बीतने के बावजूद अब तक जुर्माना अदा नहीं किया है।

क्या थी शिकायत: क्लब में 5000 मेंबर्स बनाए जा सकते हैं, लेकिन 6500 के आसपास लोगों को मेंबरशिप दे दी गई है। गवर्नमेंट इम्पलॉयी और डिपेंडेंट को मेंबरशिप में स्पेशल डिस्काउंट दिया जाता है। उस समय 61000 रुपए मेंबरशिप फीस ली जाती थी, जबकि गवर्नमेंट इम्पलॉयी को 36 हजार और डिपेंडेंट मेंबर्स को 16 हजार रुपए में मेंबरशिप मिलती थी। क्लब की पुरानी कार्यकारिणी में कुछ मेंबर्स ने अपने करीबियों को हेराफेरी से सस्ती कैटेगरी में मेंबर बना लिया।

कुछ गिने-चुने मेंबर्स की याचिका हाईकोर्ट में रिजेक्ट होना अच्छा डिसीजन है। इन मेंबर्स की तरफ से जुर्माना अदा करने की कोई जानकारी नहीं है। एडवोकेट के जरिए पता लगाएंगे। अगर इन लोगों ने जुर्माना अदा नहीं किया है तो इनके खिलाफ कंटेम्पट ऑफ कोर्ट बनता है। क्लब को बदनाम करने की साजिश के लिए अदालत से इन मेंबर्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की इजाजत भी मांगी जाएगी, ताकि भविष्य में बगैर ठोस कारण कोई क्लब की इमेज खराब न कर सके।
—मुकेश बस्सी, अध्यक्ष, चंडीगढ़ क्लब





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