पानीपत. शिक्षा विभाग की एक शाखा पूरे प्रदेश में चल रही है। इसमें 65 हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं मगर इसके लिए न कोई अध्यापक है और न ही इन्हें मिड-डे मील दिया जाता है। हैरत की बात है कि शिक्षा मंत्री को भी ऐसी किसी शाखा की जानकारी नहीं है। बात हो रही है प्राइमरी स्कूलों में शुरू की गई नर्सरी विंग की।
करीब तीन साल पहले मंत्रिमंडल ने प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नर्सरी विंग शुरू करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य चार साल तक के बच्चों को स्कूलों में लाना था। वर्तमान में 9000 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी विंग चल रही है। इनमें 65 हजार बच्चों को दाखिला दिया गया है।
सरकारी सहायता प्राप्त व बिना सहायता चल रहे निजी स्कूलों के नर्सरी स्टूडेंट्स को मिला दें तो यह आंकड़ा 1, 53,854 बन जाता है। इनमें 83669 छात्र व 70185 छात्राएं हैं।
सरकारी स्कूलों में विभिन्न फंडों के नाम पर इन बच्चों से 60 रुपए सालाना वसूले जाते हैं। इस तरह सरकार सालभर में करीब 39 लाख रुपए वसूलती है। लेकिन, बदले में इन्हें कुछ नहीं मिलता। हालांकि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि इन्हें पहली कक्षा का बच्चा मान मिड-डे मील दिया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि इनकी मिड-डे मील के लिए पात्र विद्यार्थियों में गिनती ही नहीं की जाती।
करोड़ों का बजट भी
सरकार ने 2007-08 के लिए प्लान के तहत आने वाले प्राइमरी स्कूलों के लिए 300 करोड़ व नॉन प्लान प्राइमरी स्कूलों के लिए 1000 करोड़ से अधिक की राशि तय की थी। लेकिन यह तय नहीं किया गया कि नर्सरी विंग पर कितना खर्च होगा, जबकि सरकार वर्ष 2008 को शिक्षा वर्ष के रूप में मना रही है।
मुझे तो पता नहीं कि ऐसी कोई विंग प्रदेश के स्कूलों में चल रही है। यदि ऐसा है तो मैं पता लगाऊंगा।
-मांगेराम गुप्ता, शिक्षामंत्री, हरियाणा।
हमारी मांगों के बावजूद नर्सरी व ऊपर की कक्षाओं में शिक्षकों के खाली पद नहीं भरे जा रहे। यदि पद नहीं भरने तो नर्सरी विंग नाम का फ्रॉड बंद कर देना चाहिए।
-कृष्ण कुमार निर्माण, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ।
प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी विंग है, लेकिन एडमिशन केवल आधे स्कूलों में ही हुए हैं। नर्सरी विंग के बच्चों को पहली कक्षा का मान मिड-डे मील दिया जा रहा है।
-आनंद शर्मा, निदेशक, एलिमेंटरी एजुकेशन, हरियाणा।