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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मुंबई-हावड़ा मार्ग पर मांढर के पास शनिवार सुबह 11.30 बजे रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी सुपरफास्ट की चपेट में आने से एक महिला और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। हादसे में उसका दो बरस का मासूम बच्च बुरी तरह जख्मी है। उसे आंबेडकर अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
पुलिस का मानना है, चारों एक ही परिवार के हैं। उनकी पहचान नहीं हो सकी है। मृतका की उम्र 40 वर्ष है। हादसे में मृत दो बच्चों में एक 11 साल की बच्ची और एक आठ साल का लड़का है। बताते हैं, सुबह चारों एक झोला लेकर छोकरा नाला पुल पर पहुंचे। दरअसल यह शार्टकट रास्ता है, जिसका खतरनाक तरीके से ग्रामीण इस्तेमाल करते हैं।
चारों उसी पुल से निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी पीछे से धड़धड़ाते हुए जनशताब्दी एक्सप्रेस आ गई। महिला और बच्चे घबरा गए। अचानक ट्रेन के ड्राइवर को भी खतरे का अहसास हुआ और उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मां और उससे घबराहट में चिपके दोनों बच्चों को ट्रेन ने पेट में ले लिया।
एक बच्च झटके से दूर जा गिरा था। तीनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना के बाद ट्रेन रुक गई। इंजन ड्राइवर व यात्री आनन-फानन में नीचे उतरे। उन्होंने सभी की स्थिति देखी। मासूम बच्चे की सासें चल रही थीं। उसे उन्होंने ट्रेन में ले लिया। रायपुर पहुंचकर उसे रेलवे अफसरों के जरिए अस्पताल में दाखिल कराया गया।
शव आंबेडकर अस्पताल के चीरघर में रखे हुए हैं। उनकी शिनाख्त की कोशिश की जा रही है। महिला ने लाल-सफेद रंग की चेक साड़ी पहनी है, जबकि बच्ची ने पीले रंग का पोशाक पहना है। माना जा रहा है कि मृतक मांढर के पास ग्राम टेकारी या उसके आसपास के निवासी हैं। वे पैदल रेल पटरी के रास्ते रायपुर की ओर आ रहे थे। उनके पास एक थैला था, जिसमें लाल रंग का लहंगा है।
खतरा है
दैनिक भास्कर टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुल का रास्ता इस हद तक खतरनाक है कि वहां से गुजरते वक्त अगर ट्रेन आ जाए तो भागने का मौका भी नहीं मिलेगा। मांढर-उरकुरा स्टेशन के मध्य खंभा नंबर 388 पर छोकरा नाला का यह पुल करीब 100 मीटर लंबा है। पुल पर चलने के लिए ट्रैक के बीच लोहे की पट्टी है। पुल के ठीक पहले पटरी पर मोड़ की वजह से ट्रेनें नजर नहीं आतीं। ऐसा माना जा रहा है कि महिला और बच्चे को भी पीछे से आ रही जनशताब्दी एक्सप्रेस की भनक नहीं लगी। जब तक ट्रेन नजर आई, बहुत देर हो चुकी थी।
दो घंटे तक लाशें पड़ी रहीं
महिला और उसके दोनों बच्चों के शव दो घंटे वहीं पड़े रहे। करीब दो घंटे बाद 1.30 बजे पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को भी लाशों तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर दूर तक पैदल चलना पड़ा। बताते हैं कि जीआरपी और खमतराई पुलिस में कार्रवाई को लेकर भी विवाद हो गया था। झंझट और लिखा-पढ़ी के बाद खमतराई थाना ने मामला दर्ज किया और शवों का पंचनामा हुआ।