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धूमधाम से लौटे भगवान

बिलासपुर. god ‘मौसी मां’ मंदिर में 10 दिनों तक रहने के बाद शनिवार को दोपहर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की बहुड़ा यात्रा निकाली गई। बाजे-गाजे, भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ रथयात्रा रेलवे क्षेत्र के ‘मौसी मां’ मंदिर से प्रारंभ होकर शाम को जगन्नाथ मंदिर पहुंची। भगवान का रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। जगह-जगह रथयात्रा का भव्य स्वागत किया गया।

भगवान की बहुड़ा यात्रा रेलवे क्षेत्र के उड़िया स्कूल में बनाए गए मौसी मां मंदिर से दोपहर करीब तीन बजे पूजा व छेरापहरा के साथ प्रारंभ हुई। सुबह से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी थी। मंगला आरती, पूजा-अर्चना, ध्वजारोहण व महाप्रसाद अर्पण के बाद रथ प्रतिष्ठा हुई और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की प्रतिमाएं मंदिर के गर्भगृह से निकालकर रथ पर स्थापित की गईं।

बहुड़ा यात्रा प्रारंभ होने से पहले एसईसीएल के निदेशक (कार्मिक) राधेश्याम सिंह ने राजा के वेष में छेरापहरा व पूजा की। उन्होंने कहा कि उड़िया समाज का यह कार्यक्रम भाईचारे का श्रेष्ठ प्रतीकात्मक स्वरूप है।

बहुड़ायात्रा के लिए रथ को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। रथ के आगे लगे दो रस्सों को खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ के आगे उड़ीसा से आई मंडली भजन-कीर्तन करती चल रही थी और पीछे सैकड़ों श्रद्धालु जगन्नाथ के जयकारे लगाते चल रहे थे। राह में सैकड़ों महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की। रथ पर सवार पुजारी प्रसाद बांटते चल रहे थे।

भगवान जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथयात्रा आजाद चौक, दयालबंद, गांधी चौक, हाईकोर्ट रोड, टैगोर चौक, तारबाहर चौक, रेलवे स्टेशन, तितली चौक होते हुए उड़िया स्कूल स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। यहां मंदिर में पुन: देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। बहुड़ा यात्रा के साथ ही मौसी मां मंदिर में 10 दिनों से चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी समापन हो गया।





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