जोधपुर. शहर में रोजाना करीब सवा पांच सौ लाख गैलन पानी की सप्लाई होती है,लेकिन उपभोक्ताओं को तीन सौ लाख गैलन पानी के ही बिल जारी किए जाते हैं।
पानी की छीजत के अलावा हजारों के तादाद में उपभोक्ताओं के मीटर बंद होने की वजह से रोजाना 7-8 लाख रुपए का पीएचईडी को नुकसान हो रहा है। बेंगलूर, जमशेदपुर व गांधीनगर की तर्ज पर पीएचईडी जोधपुर में किसी एक क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट के तहत सप्लाई , उपभोक्ताओं को मिलने वाला पानी और छीजत का हिसाब रखने का जिम्मा एक कंपनी को देगी।
लिफ्ट कैनाल से कायलाना झील में आने वाले पानी से शहर को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अपने नेटवर्क से सप्लाई करता है। ऐसे में रोजाना करीब 225 लाख गैलन पानी,जो कि कुल सप्लाई का करीब 43 फीसदी होता है, इतनी छीजत होना राजस्व का बड़ा नुकसान है।
पानी की छीजत अधिकतम 20 प्रतिशत मानें तो करीब सौ लाख गैलन से अधिक होता है। फिर भी दो सौ लाख गैलन पानी का कोई हिसाब ही नहीं है। पीएचईडी अधिकारियों का मानना है कि उपभोक्ताओं के मीटर बंद होने की वजह से इतने पानी का हिसाब नहीं मिल पाता है। पीएचईडी अब पानी की छीजत और बंद पड़े मीटर की वजह से हो रहे नुकसान को रोकने की कोशिश करेगा।
बूंद-बूंद पानी का होगा हिसाब
बेंगलूर,जमशेदपुर व गांधीनगर में पानी की छीजत कम करने और पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए गए। उसके तहत एक सप्लाई पाइंट पर मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को मिलने वाला पानी और छीजत का पूरा ब्यौरा तैयार किया जाता है। उसी तर्ज पर जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।
पीएचईडी ने अब जोधपुर में बरकतुल्ला खान स्टेडियम सप्लाई पाइंट से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का मानस बनाया है। इससे पानी की कहां व कैसे छीजत हो रही है और कितने मीटर बंद हैं, इसका पूरा ब्यौरा हासिल किया जाएगा। जमशेदपुर में पायलट प्रोजेक्ट चलाने वाली कंपनी से बातचीत की जा रही है।
छीजत रोकने की होगी कवायद
इस पायलट प्रोजेक्ट से स्पष्ट हो जाएगा कि रोजाना सप्लाई होने वाले पानी में कितना पीएचईडी की बिछाई पाइपलाइन और उससे घरों में जाने वाली सर्विस लाइन तक पानी का रिसाव हो रहा है। रिसाव वाले पाइप बदले जाएंगे। बंद पड़े मीटर का पता चलने पर वे भी बदले जाएंगे। इससे पानी की छीजत मे कमी आएगी।
छीजत व मीटर बंद होने के वजह से रोजाना सवा दौ सौ लाख गैलन पानी की कीमत पीएचईडी को नहीं मिल पाती है। उसके रोकने के पायलट प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है।’
—केएम माथुर, चीफ इंजीनियर,पीएचईडी।