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भवन गिरा तो कॉलेज प्रशासन जिम्मेदार

कोटा. राजकीय कॉलेज में प्रशासनिक भवन के प्रथम तल पर बन रहे हॉल निर्माण को सार्वजनिक निर्माण विभाग ने गंभीर माना है। विभाग के अधिकारियों ने इसकी सूचना न्यास सचिव व प्राचार्य को भी दे दी है।

कॉलेज प्रशासन ने सहभागिता योजना में नगर विकास न्यास के माध्यम से प्रशासनिक भवन के प्रथम तल पर हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। इस हॉल पर पिछले दिनों छत डाली गई है, छत के डालने से पिछले रविवार को नीचे की दीवारों का प्लस्तर गिर गया।

प्लस्तर गिरने का कारण छत का लोड नीचे की पुरानी दीवारों द्वारा वहन नहीं कर पाना माना गया है। जैसे ही इसकी सूचना पीडब्ल्यूडी को मिली, अतिरिक्त मुख्य अभियंता जेएल राव की अगुवाई में अभियंताओं की टीम ने इस निर्माण का अवलोकन किया। जांच में छत डालने से पहले नीचे की दीवारों का लोड नहीं नापने पर इसे गंभीर माना। यह भी माना कि छत की शटरिंग खोलने पर कोई भी हादसा हो सकता है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने कॉलेज प्राचार्य व न्यास सचिव को पत्र लिखा है।

बिना स्वीकृति किया निर्माण
निर्माण विभाग के अभियंताओं का मानना है कि सरकारी इमारतों में निर्माण कराने की जिम्मेदारी उनके विभाग की है। कॉलेज प्रशासन ने यदि कोई निर्माण कराया है तो उसे हेरिटेज को ध्यान में रखना चाहिए था। साथ ही इसकी स्वीकृति उनके विभाग से लेनी चाहिए थी। जिस प्रकार हॉल के लिए छत डाली गई है, उससे नीचे की दीवारें क्षतिग्रस्त हो सकती है। दीवारें पुरानी है।

निर्माण विभाग ने जताई आपत्ति
प्राचार्य माधोलाल मीणा ने बताया कि निर्माण विभाग ने उन्हें पत्र भेजा है। इसमें लिखा है कि इस भवन का उपयोग रिस्कभरा है। वे अपनी जिम्मेदारी पर ही इसका उपयोग करें। उन्होंने कहा कि निर्माण विभाग के अभियंता इस मामले को जानबूझकर तूल दे रहे हैं। न्यास ने बेहतर कार्य किया है, इसलिए निर्माण विभाग वाले जान बूझकर इसे खराब बता रहे हैं।

कॉलेज प्रशासन ने जानबूझकर न्यास से कार्य कराया है, इसी बात से निर्माण विभाग के अभियंता खफा हैं। निर्माण विभाग से काम कराने पर काफी अधिक राशि खर्च करनी होती है और कार्य भी खराब होता है, न्यास से काम कराने पर राशि की बचत होती है और काम भी बेहतर होता है।





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