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Chandigarh Chandigarh पटियाला.
खेल और खिलाड़ियों की अंतहीन दुर्दशा और इसमें किसी तरह का सुधार न होने से निराश एथलीट अब प्रदेश ही नहीं देश भी छोड़ कर जाने लगे हैं। ऐसी ही एक एथलीट हैं डिस्कस थ्रो की ओलंपियन हरवंत कौर। वे एक साल बाद ऑस्ट्रेलिया की एथलीट के रूप में जानी जाएंगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई स्पोर्ट्स टीम का हिस्सा बनने का फैसला कर लिया है। उन्हें ऑस्ट्रेलिया की स्थाई रिहायश (परमानेंट रेजीडेंसी) के लिए मंजूरी मिल गई है।
हरवंत ने कहा कि इस बार तो वे बीजिंग ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, लेकिन इसके बाद सरकार ने यदि उनके लिए कुछ नहीं किया तो वे 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलियाई एथलीट के रूप में शिरकत करेंगी।
तनाव में हैं हरवंत कौर : पंजाब में स्पोर्ट्स की बदहाली से खिलाड़ी दुखी हैं और माहिर इसके सुधार की बात कर रहे हैं। डिस्कस थ्रो एथलीट हरवंत कौर इन दिनों तनाव के बीच एनआईएस में ओलंपिक की तैयारी में जुटी हैं।
खेल के लिए वतन छोड़ देंगी : उन्होंने रविवार को भास्कर से अपनी परेशानी साझा की और ऐलान किया कि वे अपने खेल जीवन हिफाजत के लिए वतन छोड़ देंगी। हरवंत ने देश के लिए एशियन एवं कॉमवेल्थ गेम्स में कई मेडल जीते हैं।
प्रमोशन नहीं डिमोशन मिली : 2002 में वह एलआईसी में कार्यरत थीं। उनकी परफार्म्ेस देखते हुए पंजाब पुलिस ने उसे 2003 में एएसआई बनाया था और समय-समय पर प्रमोशन देने का फैसला किया था। लेकिन हुआ उल्टा और वह थानेदार से कांस्टेबल बन तक गई।
खर्चा पूरा नहीं हो रहा: हरवंत की फिटनेस और डाइट का मासिक खर्चा करीब 50 हजार रुपए है। कांस्टेबल की नौकरी से यह पूरा नहीं हो रहा। सरकारी नीतियों से आजिज आकर ही आस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों से कर देंगी।
हरवंत कौर का फैसला दुखद है। इस विषय पर पंजाब सरकार से बात करेंगे और उसकी परेशानियां दूर करने को कहेंगे।
-राजा रणधीर, सेक्रेटरी जनरल, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन