नई दिल्ली.दो व्यक्तियों पर दुष्कृत्य का झूठा मामला दर्ज कराने वाली मध्यप्रदेश की एक महिला को सुनाई गई तीन माह की जेल की सजा को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झूठी गवाही देने वालों के साथ कड़ाई से निपटने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस अरिजित पसायत और पी सथशिवम की बेंच ने कहा कि मौखिक साक्ष्यों पर निर्भर रहने वाले मामलों में झूठी गवाही देने के प्रकरणों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इस समस्या से प्रभावी ढंगसे निपटने के लिए अदालतों को कानूनी प्रावधानों का कारगर तरीके से बार-बार इस्तेमाल करना चाहिए।
दाग नहीं जाएगा : शीर्ष कोर्ट ने कहा कि झूठे मामले में आरोपी बनाए गए दोनों व्यक्तियों को बरी किए जाने के बाद उन पर दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले का बदनुमा दाग भले ही थोड़ा धुल गया हो, लेकिन यह काफी नहीं है।
क्या था मामला :
मध्यप्रदेश के पिछोर की महिला विनोद कुमार ने 28 जनवरी, 1993 को दो व्यक्तियों पर डरा-धमकाकर सामूहिक दुष्कृत्य करने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। लेकिन गवाही के दौरान महिला विनोद कुमार ने दुष्कृत्य और इस संबंध में रिपोर्ट से इनकार किया। बाद में उसने कोर्ट में कहा कि अशिक्षित होने के कारण उसने परिजनों के दबाव में आकर मामला दर्ज कराया था।
निचली कोर्ट ने इस पर दोनों आरोपियों को बरी करते हुए महिला विनोद कुमार को तीन माह की जेल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।