नई दिल्ली.
वाहन खरीदने के लिए बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते समय शायद आप यही सोचते होंगे कि वह सबको एक समान दर पर लोन देती है। आपको लगता होगा कि लोन की दर में फर्क सिर्फ गाड़ियों परहोता होगा। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो जरा ठहरिए,यह सच नहीं है क्योंकि सभी बैंक व फाइनेंस कंपनियां आपके क्रेडिट प्रोफाइल देख कर ही ब्याज दर करती हैं।
इसलिए अगर आप ऑटो लोन लेने की चाह रखते हैं और चाहते हैं कि कम ब्याज दर पर लोन मिल जाए तो अपना क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बना कर रखें। ऑटो लोन देने से पहले फाइनेंस कंपनियां आपकी आर्थिक स्थिति, पेशा, रहने की जगह, पहले लिए गए कर्ज देख कर लिए ब्याज दर तय करती हैं। प्रोफाइल के हिसाब से ऑटो लोन में ब्याज दर का अंतर एक-दो फीसदी तक हो सकता है।
प्रोफाइल का असर :
आईसीआईसीआई बैंक की ओर से दुपहिया वाहनों के लिए दिए जाने वाले कर्ज की दर का अंतर सबसे ज्यादा है। इस बारे में बैंक के वाहन कर्ज प्रमुख एन. आर. नारायणन का कहना है कि हम जोखिम की गणना कर लोगों के लिए ब्याज दर तय करते हैं। कर्ज देने से पहले कर्ज लेने वाले का घर, उसकी आय, संपत्ति आदि को देख कर ब्याज दर तय होती है। इसके अलावा अगर हमारी किसी शाखा में डिफाल्टर ज्यादा हों, तो भी हम ऊंची ब्याज दर रख सकते हैं।
यही नहीं अगर आपकी आमदनी ज्यादा है मगर आप जोखिम वाले क्षेत्र के निवासी हैं तो संभव है कि आपको ब्याज ज्यादा देना पड़े। फुलट्रॉन बैंक के विष्णु ने बताया कि बैंक देखता है कि आप विवाहित हैं या नहीं। परिवार के साथ रहते हैं या अकेले। कितने महीनों या सालों से उस शहर के निवासी हैं। पेशे में कितने दिनों से हैं। यह सब देख बैंक कर्ज, रकम और ब्याज दर तय करती है।
बैंक अलग, कायदे अलग :
अलग-अलग बैंक या फाइनेंस कंपनियां अपने जोखिम उठाने की क्षमता के मुताबिक ही कर्ज देते हैं। विष्णु के मुताबिक मसलन अगर आप एक बैंक की मानकों पर खरा नहीं उतरे तो जरूरी नहीं कि अन्य बैंक भी आपको कर्ज न दे। आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और अन्य बड़े बैंक ऊंची ब्याज दरों पर यह जोखिम उठा सकती हैं। कई बैंक पॉलिसी के अनुसार गाड़ियों की कीमत का 60 से 80 फीसदी तक फाइनेंस करती है।
दुपहिया पर ब्याज दर ज्यादा :
आंकड़ों के मुताबिक देश के 250 शहरों के 95 फीसदी लोग दुपहिया वाहन के लिए कर्ज लेते हैं। इसके बावजूद बड़े बैंक जैसे पीएनबी, स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई आदि इनके खरीदारों को कर्ज देने में दिलचस्पी नहीं रखते क्योंकि इसकी लोन राशि कम होती है। साथ ही इस लोन में रिस्क ज्यादा है। दुपहिया लोन ज्यादातर कम आय वाले लोग ही लेते हैं। इसलिए बैंकों को अपनी राशि डूबने का डर ज्यादा होता है। दुपहिया वाहनों पर ब्याज दर इसलिए ज्यादा है क्योंकि हर प्रकार के वाहनों पर पेपर वर्क और ऑपरेटिंग कॉस्ट एक समान आता है।
दुपहिया वाहनों का कर्ज कम
होने से लोग इसे चुकता भी जल्दी कर देते हैं। इससे बैंक को फायदा भी ज्यादा नहीं होता। पीएनबी के वी.के. गुप्ता के अनुसार ऐसा बैंक पॉलिसी के तहत किया जाता है।
कैसे सुधारें प्रोफाइल
अगर आपने किसी बैंक से किसी भी तरह का लोन लिया हो या क्रेडिट कार्ड बनवाया हो तो उसकी किश्त समय पर भरें। कोई बकाया न रखें क्योंकि अब सभी बैंक अपने डिफॉल्टरों की जानकारी एक दूसरे को देते हैं। इनका एक डाटा सेंटर है जो सभी बैंकों से जुड़ा है। इसलिए अगर आप किसी बैंक से धोखाधड़ी करते हैं तो डिफॉल्टर के रूप में आपका नाम शामिल हो जाता है। साथ ही अगर आपने किसी बैंक में अपना खाता खुलवाया हो तो उसे संतुलित रखें। अगर ऐसा नहीं कर सकते हों तो उसे समय रहते बंद करवा दें। नारायणन के मुताबिक ऑटो लोन पूरी तरह से वाहनों की बिक्री पर निर्भर करता है। पीएनबी में भी कार के लिए ब्याज दर 11.75 से 12.25 फीसदी है तो दुपहिया वाहन पर यह दर 16.5 से 17 फीसदी है।
बैंक कार दोपहिया
आईसीआईसीआई 14.50-16.0क् 13.50-22.00
एचडीएफसी 13.25-15.00 १3.5क्-17.00
कोटक महिंद्रा 12.00-16.00 —-
पीएनबी 11.75-12.25 16.5-17.00
विजया बैंक 10.50-11.00 क् 12.00 (फ्लैट)
एक्सिस बैंक 13.50-14.00 13.50-14.00
(दर फीसदी में )