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फन-डे की बजाए दिक्कतों का संडे

भोपाल. रविवार को न्यू मार्केट जाना परेशानी का सबब बन गया है। वजह है आम आदमी को वाहन पार्क करने की जगह न मिलना। आलम यह है कि वाहन पार्क करते और निकालते समय पार्किग ठेकेदार के कर्मचारियों और ट्रैफिक पुलिस से विवाद की स्थिति बन जाती है। मार्केट की व्यवस्था को दुरुस्त करने बहुमंजिला पार्किग निर्माण के साथ ही ठेले और फेरी वालों को बाहर करना होगा।

करीब सात माह पहले न्यू मार्केट को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था। रविवार को मार्केट का जायजा लेने पर ऐसा लगता है, जैसे कुछ लोग जान-बूझकर नो-व्हीकल जोन को खत्म करने पर आमादा हैं। मार्केट में सड़क किनारे हो रही पार्किग को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए यह नियम बनाया गया है कि केवल एक लाइन में ही वाहन पार्क होंगे। पार्किग का इंतजाम संभाल रहे ठेकेदार के कर्मचारी दो-तीन लाइन में गाड़ियां लगवा देते हैं और बाद में ट्रैफिक पुलिस की क्रेन उन्हें उठाकर ले जाती है।

अपर्याप्त पार्किग स्थल: सिविल इंजीनियर योगेश श्रीवास्तव के अनुसार व्यस्त समय में न्यू मार्केट आने वाले 12,000 दोपहिया और 2,000 चारपहिया वाहनों में से बमुश्किल से 50 प्रतिशत के लिए ही पार्किग की जगह है। सड़क पर पार्किग की बजाय कम्युनिटी हॉल और रोशनपुरा पर बहुमंजिला पार्किग बनाई जानी चाहिए और अपेक्स बैंक परिसर में पार्किग की अनुमति मिलना चाहिए।

सड़क पर हो रही पार्किग तो पूर्णत: बंद की जानी चाहिए।
फेरी वालों का कब्जा: बैरिकेड लगने से ठेले तो मार्केट के भीतर नहीं जा पा रहे, लेकिन फेरी लगाकर सामान बेचने वालों ने मार्केट के भीतर कब्जा जमा लिया है। स्टेट बैंक के सामने बने नए चबूतरे पर और उसके आसपास इन लोगों को बैठे और घूमते हुए देखा जा सकता है। यही स्थिति ग्वालियर चाट हाउस के आसपास भी देखी जा सकती है।

इतना ही नहीं दोपहर के समय मार्केट के भीतर कुछ दोपहिया वाहन चालक भी घुस आते हैं। व्यवस्था संभालने के लिए तैनात नगर निगम कर्मचारियों को फेरी वालों के साथ बैठे हुए भी देखा जा सकता है। मार्केट के दुकानदारों का अतिक्रमण अब भी बरकरार है। लगभग सभी गलियों में दुकानों के बाहर सामान रखा हुआ देखा जा सकता है।

सड़क पर ठेलों का कब्जा-
नो व्हीकल जोन घोषित होने के बाद से ही स्टेडियम से टीटी नगर थाना होते हुए रंगमहल चौराहा तक वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। बाजार से बाहर किए गए ठेले वालों ने इस पूरी सड़क पर कब्जा कर रखा है। स्टेट बैंक के सामने लगे बैरिकेड वाले हिस्से को ‘नो पार्किग’ घोषित किया गया है, ताकि बाजार के भीतर आने- जाने में आम लोगों को दिक्कत न हो, लेकिन यह स्थान आटो और ठेले वालों ने घेर लिया है। रंगमहल चौराहा पर ठेले लगने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन ने नार्थ टीटी नगर के खाली मकानों के बीच की जगह ठेलों के लिए आरक्षित कर रखी है, लेकिन यहां एक भी ठेला नहीं लगता।

क्या कहते हैं व्यापारी :
हर व्यापारी चाहता है कि नो व्हीकल जोन की व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन के बड़े अधिकारियों को इसमें सख्ती बरतना चाहिए।
-विजय खंडेलवाल, अध्यक्ष, न्यू मार्केट व्यापारी संघ

नगर निगम को पार्किग स्थल पर खड़े होने वाले वाहनों की संख्या तय करना चाहिए और नए पार्किग स्थल विकसित किए जाने चाहिए।
-हरीश ज्ञानचंदानी, महामंत्री, न्यू मार्केट व्यापारी संघ

नो-व्हीकल जोन सहित न्यू मार्केट की अन्य व्यवस्थाओं पर विचार के लिए जल्द ही व्यापारियों के साथ एक बैठक बुलाई जाएगी। इसी तरह बोट क्लब से नियमित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। समस्या के स्थायी हल के कुछ उपायों पर विचार चल रहा है।
-सुनील सूद, महापौर

रविवार को मनोरंजन के लिए बोट क्लब जाने वाले लोग भी बेतरतीब पार्किग और अतिक्रमण से परेशान हैं। यहां नगर निगम बार-बार कार्रवाई करता है, लेकिन लोग बाज नहीं आते।

कुछ सालों में बोट क्लब एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गया है। खासतौर से रविवार या अन्य छुट्टी के दिन यहां शाम को काफी भीड़ रहती है। आम दिनों में यदि यहां 5,000 लोग आते हैं तो रविवार शाम को यह संख्या बढ़कर 10,000 हो जाती है। इस दौरान यहां कम से कम 4,000 वाहनों की कतार लग जाती है। शाम को सारे ठेले एक जगह खड़े होते हैं और सड़क पर गाड़ियां पार्क होती हैं।

व्यापारियों का कब्जा: नगर निगम द्वारा श्यामला फिल्टर प्लांट के पास एक पार्किग स्थल विकसित किया गया था, पर यहां आम लोगों की बजाय कुछ स्थानीय व्यापारियों ने कब्जा कर लिया है। यहां पर निजी ट्रेवल्स के वाहन खड़े हुए देखे जा सकते हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार किलोल पार्क के पास बने हाकर्स कॉर्नर में व्यापारी जाने को तैयार नहीं हैं। अब निगम, भारत भवन के आसपास हाकर्स कॉर्नर बनाने पर विचार कर रहा है।





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फन-डे की बजाए दिक्कतों का संडे

भोपाल. रविवार को न्यू मार्केट जाना परेशानी का सबब बन गया है। वजह है आम आदमी को वाहन पार्क करने की जगह न मिलना। आलम यह है कि वाहन पार्क करते और निकालते समय पार्किग ठेकेदार के कर्मचारियों और ट्रैफिक पुलिस से विवाद की स्थिति बन जाती है। मार्केट की व्यवस्था को दुरुस्त करने बहुमंजिला पार्किग निर्माण के साथ ही ठेले और फेरी वालों को बाहर करना होगा।

करीब सात माह पहले न्यू मार्केट को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था। रविवार को मार्केट का जायजा लेने पर ऐसा लगता है, जैसे कुछ लोग जान-बूझकर नो-व्हीकल जोन को खत्म करने पर आमादा हैं। मार्केट में सड़क किनारे हो रही पार्किग को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए यह नियम बनाया गया है कि केवल एक लाइन में ही वाहन पार्क होंगे। पार्किग का इंतजाम संभाल रहे ठेकेदार के कर्मचारी दो-तीन लाइन में गाड़ियां लगवा देते हैं और बाद में ट्रैफिक पुलिस की क्रेन उन्हें उठाकर ले जाती है।

अपर्याप्त पार्किग स्थल: सिविल इंजीनियर योगेश श्रीवास्तव के अनुसार व्यस्त समय में न्यू मार्केट आने वाले 12,000 दोपहिया और 2,000 चारपहिया वाहनों में से बमुश्किल से 50 प्रतिशत के लिए ही पार्किग की जगह है। सड़क पर पार्किग की बजाय कम्युनिटी हॉल और रोशनपुरा पर बहुमंजिला पार्किग बनाई जानी चाहिए और अपेक्स बैंक परिसर में पार्किग की अनुमति मिलना चाहिए।

सड़क पर हो रही पार्किग तो पूर्णत: बंद की जानी चाहिए।
फेरी वालों का कब्जा: बैरिकेड लगने से ठेले तो मार्केट के भीतर नहीं जा पा रहे, लेकिन फेरी लगाकर सामान बेचने वालों ने मार्केट के भीतर कब्जा जमा लिया है। स्टेट बैंक के सामने बने नए चबूतरे पर और उसके आसपास इन लोगों को बैठे और घूमते हुए देखा जा सकता है। यही स्थिति ग्वालियर चाट हाउस के आसपास भी देखी जा सकती है।

इतना ही नहीं दोपहर के समय मार्केट के भीतर कुछ दोपहिया वाहन चालक भी घुस आते हैं। व्यवस्था संभालने के लिए तैनात नगर निगम कर्मचारियों को फेरी वालों के साथ बैठे हुए भी देखा जा सकता है। मार्केट के दुकानदारों का अतिक्रमण अब भी बरकरार है। लगभग सभी गलियों में दुकानों के बाहर सामान रखा हुआ देखा जा सकता है।

सड़क पर ठेलों का कब्जा-
नो व्हीकल जोन घोषित होने के बाद से ही स्टेडियम से टीटी नगर थाना होते हुए रंगमहल चौराहा तक वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। बाजार से बाहर किए गए ठेले वालों ने इस पूरी सड़क पर कब्जा कर रखा है। स्टेट बैंक के सामने लगे बैरिकेड वाले हिस्से को ‘नो पार्किग’ घोषित किया गया है, ताकि बाजार के भीतर आने- जाने में आम लोगों को दिक्कत न हो, लेकिन यह स्थान आटो और ठेले वालों ने घेर लिया है। रंगमहल चौराहा पर ठेले लगने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन ने नार्थ टीटी नगर के खाली मकानों के बीच की जगह ठेलों के लिए आरक्षित कर रखी है, लेकिन यहां एक भी ठेला नहीं लगता।

क्या कहते हैं व्यापारी :
हर व्यापारी चाहता है कि नो व्हीकल जोन की व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन के बड़े अधिकारियों को इसमें सख्ती बरतना चाहिए।
-विजय खंडेलवाल, अध्यक्ष, न्यू मार्केट व्यापारी संघ

नगर निगम को पार्किग स्थल पर खड़े होने वाले वाहनों की संख्या तय करना चाहिए और नए पार्किग स्थल विकसित किए जाने चाहिए।
-हरीश ज्ञानचंदानी, महामंत्री, न्यू मार्केट व्यापारी संघ

नो-व्हीकल जोन सहित न्यू मार्केट की अन्य व्यवस्थाओं पर विचार के लिए जल्द ही व्यापारियों के साथ एक बैठक बुलाई जाएगी। इसी तरह बोट क्लब से नियमित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। समस्या के स्थायी हल के कुछ उपायों पर विचार चल रहा है।
-सुनील सूद, महापौर

रविवार को मनोरंजन के लिए बोट क्लब जाने वाले लोग भी बेतरतीब पार्किग और अतिक्रमण से परेशान हैं। यहां नगर निगम बार-बार कार्रवाई करता है, लेकिन लोग बाज नहीं आते।

कुछ सालों में बोट क्लब एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गया है। खासतौर से रविवार या अन्य छुट्टी के दिन यहां शाम को काफी भीड़ रहती है। आम दिनों में यदि यहां 5,000 लोग आते हैं तो रविवार शाम को यह संख्या बढ़कर 10,000 हो जाती है। इस दौरान यहां कम से कम 4,000 वाहनों की कतार लग जाती है। शाम को सारे ठेले एक जगह खड़े होते हैं और सड़क पर गाड़ियां पार्क होती हैं।

व्यापारियों का कब्जा: नगर निगम द्वारा श्यामला फिल्टर प्लांट के पास एक पार्किग स्थल विकसित किया गया था, पर यहां आम लोगों की बजाय कुछ स्थानीय व्यापारियों ने कब्जा कर लिया है। यहां पर निजी ट्रेवल्स के वाहन खड़े हुए देखे जा सकते हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार किलोल पार्क के पास बने हाकर्स कॉर्नर में व्यापारी जाने को तैयार नहीं हैं। अब निगम, भारत भवन के आसपास हाकर्स कॉर्नर बनाने पर विचार कर रहा है।





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