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इन्हें कौन कराए रिहा!

जोधपुर.thar पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाने के बाद पंजाब के सबरजीत की रिहाई को लेकर राजनीतिक हलचल व मीडिया की सुर्खियों के बीच बाड़मेर के छह युवक सजा पूरी के होने के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में नरक का दंश झेल रहे है।

कहीं बूढ़े मां-बाप आखिरी सांस निकलने से पहले अपने बेटे के लौट आने की उम्मीद पाले हैं तो कहीं बरसों से विछोह सह रही पत्नियों को जीवनसाथी की रिहाई का बेसब्री से इंतजार है। जबकि दुखद पहलू यह है पाकिस्तानी जेलों में बंद इन निर्दोष युवकों के रिहाई के लिए उच्च स्तर पर पैरवी करने वाला कोई नहीं।

न कभी राज्य सरकार ने दिलचस्पी दिखाई और ना ही उस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने। यही नहीं मानवाधिकार आयोग ने भी कभी इनके लिए कभी आवाज नहीं उठाई। सरहद पर बसे इन बंदियों के बेबस व गरीब परिजनों को भरोसा है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद उनके लाडले जल्द ही अपने घर लौट आएंगे।

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़मेर जिले की चौहटन तहसील के सीमावर्ती छोर पर बसे पांच गांवों के इन युवकों की पाकिस्तान की जेलों में बंद होने की दास्तान बड़ी मार्मिक है। घर के चूल्हे या फिर बीएसएफ के जवानों की रसोई के लिए लकड़ी लाने के लिए अनजाने में सीमा पार करना उनकी जिंदगी के लिए अभिशाप बन गया। कोई सत्रह साल पहले तो कोई आठ साल पहले काफी यातनाएं सहने के बाद जेलों में ठूंस दिए गए। जेल में लंबे समय से बंद इन बंदियों की सजा भी पूरी हो चुकी है।

डेढ़- दो साल पहले चौहटन तहसील के ही सूरजाराम, इसराराम व ईशानखान की रिहाई के बाद इनके परिजनों की उम्मीदों के पंख लग गए, मगर उनकी सार्थक पैरवी नहीं होने से रिहाई नहीं हो पा रही है।

ये हैं थार के सरबजीत >>>

विछोह का हर पल भारी : रसबानी गांव निवासी कोजाखान उर्फ सुभार खान सितंबर 2000 में सरहद पर लापता हुए अपने छोटे भाई अनवर खान को तलाशने सीमा पार जा पहुंचा था। उसे पाक रेंजर्स ने काफी यातनाएं देने के बाद कराची जेल भेज दिया।

उसने पिछले साल सजा पूरी होने पर जेल से रिहाई की उम्मीद जताई थी। पाकिस्तान से उसके सत्यापन की रिपोर्ट मांगी गई, जो उसके चाचा सच्चूखान ने भेज दी, मगर उसे आज तक रिहा नहीं किया गया। कोजा खान शादी के तीन साल और पत्नी के गौना होने के कुछ महीनों बाद ही लापता हो गया था। उसकी पत्नी शफियत पीहर में पति के लौटने का से इंतजार कर रही है।

उसने बताया कि तंहाई में लंबा अरसा गुजार दिया,मगर पति के विछोह का हर पल अब भारी गुजरता है। पति लौट आए तो जियारत कर खुदा का शुक्र अदा करूंगीं। मीरु खान का छोटा भाई अनवर भी हैदराबाद जेल में बंद है। वह 13 मार्च 2000 को घर का चूल्हा जलाने के लिए सीमा की ओर लकड़ी काटने गया था और रेंजर ने पकड़ लिया। उसने दो साल पहले भेजे पत्र में सजा पूरी होनी की बात लिखी थी, मगर अभी तक नहीं लौटा।

दुखों का पहाड़ टूट पड़ा : मतीर जेल में बंद समेजों की ढाणी निवासी बीजाराम मेघवाल 22 फरवरी 99 को बीएसएफ के जवानों के लिए लकड़ी काटते सीमा पार करते पाक रेंजर पकड़ ले गए थे। सत्तर साल के उसके पिता बुधुराम तो बीजाराम के बारे में पूछते ही फफक कर रो पड़ते हैं। उखड़ती सांसों के बीच बमुश्किल रुलाई रोकते हुए बोले की कि बस आखिरी इच्छा है कि दम निकलने से पहले बीजाराम को एक बार देख लू। बुधुराम ने बताया कि वह भीख मांगकर पोते-पोतियों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में मदद करता है। पाकिस्तान की जेल में बंद बेटे के रिहाई के लिए क्या कर सकता हूं।

बीजाराम की पत्नी श्रीमती राजी बताती है कि पति के पत्र में जेल में यातनाएं देने से लेकर सजा पूरी होने के बारे में जानकर दिल में शूल चुभती है। उसे इस बात का मलाल है कि पति की रिहाई में उनकी कोई मदद करने वाला नहीं। बीजाराम के लापता होने के तीन महीने बाद पैदा हुए रुपा भी उम्मीद पाले है कि पिता कभी तो घर लौट आएंगे।

भाई ने उम्मीद छोड़ी : भीलों का तला निवासी टीलाराम 17 साल पहले बार्डर पर लकड़िया चुनने गया और सीमा पार करने पर पकड़ा गया। घरवालों को उसके हैदराबाद जेल में बंद होने की खबर मिली, मगर कभी उसका कोई पत्र नहीं आया। मां-बाप सदमे में ही चल बसे और भाई हुकमाराम ने भी निराश होकर उसके लौट आने की उम्मीद ही छोड़ दी है। उसने बताया कि पाकिस्तान से आए कुछ लोगों ने बताया कि उसके भाई की मौत हो चुकी है,मगर इस बारे कोई पुष्टि नहीं हुई ,न ही कोई उसकी कोई खबर आई है।

कब लौटेगा बेटा : आरबी के गफन निवासी मीरु खान सितंबर 1999 से हैदराबाद सिंध जेल में बंद है। उसकी बूढ़ी मां सालिया रोते हुए बताती हैं कि नौ साल पहले खोया उसका जिगर का टुकड़ा न जाने कब लौटेगा। उसके निर्दोष बेटों की सजा भी पूरी हो चुकी है,मगर उसकी रिहाई के लिए कोई आवाज उठाने वाला नहीं है। उसकी सांस उखड़े उससे पहले मीरु आ जाए, बस यही तमन्ना है।

मीरु खान के लापता होने से पहले रहिमा के साथ सगाई हो चुकी थी। तीन साल तक मीरु खान के नहीं लौटने पर उसकी शादी मीरु के छोटे भाई इब्राहीम से कर दी गई।

बाप की शक्ल भूल गया : हैदराबाद सिंध की जेल में बंद सरुपों का तला निवासी साहूराम मेघवाल 31 मई 89 अनजाने में सीमा पार होते ही उसे रेंजर ने पकड़ लिया। उस सदमे में पत्नी व बेटी चल बसी। अब उसके परिवार में अकेला बेटा मेघाराम है जिसे पिता की शक्ल याद नहीं। जब वे लापता हुए तब वह 8 साल का था। उसने बताया कि पिता के लापता होने के समय वह सिर्फ आठ साल का था। वह तो उनकी शक्ल ही भूल चुका है।

पिता के जेल में बंद होने के बारे में उनके जाने के छह महीने बाद पत्र मिलने पर पता चला था। आखिरी पत्र 27 फरवरी 1990 को आया था उसके बाद से उनका कोई पता नहीं है।





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