संपादकीय. अरसे बाद देश की केंद्रीय राजनीति में उत्तर प्रदेश एक बार फिर से चुंबकीय फैक्टर के रूप में उभरा है। विभिन्न राजनीतिक ताकतें दिल्ली पर काबिज होने के लिए यूपी का रास्ता खोज रही हैं।
हालांकि दो दशक की गठबंधन राजनीति ने इसके राजनीतिक महत्व को कम करने में कुछ भूमिका जरूर निभाई थी, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण 39 सांसदों के साथ पिछले साढ़े चार साल से अप्रासंगिकता झेल रहे मुलायम सिंह यादव थे। लेकिन अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूरियों के चलते एक मंच पर आए कांग्रेस और मुलायम सिंह ने फिर से उत्तर प्रदेश के महत्व को उजागर कर दिया। मायावती के जो मामले धीरे-धीरे बंद हो रहे थे वे अब फिर से खुलने लगे हैं और अवसरवाद को राजनीति का शिष्टाचार बना देने वाली इस ‘महारानी’ को भी नए-नए राजनीतिक सहयात्री मिलने लगे हैं।
आम धारणा यह है कि संप्रग सरकार के विश्वास मत प्राप्त करने के रास्ते में मायावती की नकारात्मक भूमिका के प्रभाव को कम करने के लिए उन पर दबाव बढ़ाया जा रहा है ताकि समाजवादी पार्टी की संभावित टूट-फूट को रोका जा सके। लेकिन इन तात्कालिक कारणों के अलावा भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों की गोलबंदी भी इस सारी कवायद की पृष्ठभूमि में दिखाई पड़ रही है।
जिस तरह मुलायम सिंह की ‘दगाबाजी’ से आहत वामदलों ने माया मेमसाहब की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और भारतीय जनता पार्टी भी उनके बचाव में कूदी है। उससे लगता है कि भविष्य में मायावती की भूमिका के महत्व को समझा जाने लगा है। एक तरफ कांग्रेस मुलायम सिंह का झंडा उठाए हुए है तो दूसरी ओर विपक्ष की दो अंतर्विरोधी ताकतें मायावती को अपनी ओर खींचने में व्यस्त हैं।
मायावती को भी अपने राजनीतिक महत्व का अहसास है। इसीलिए वे बेखौफ हो सीबीआई पर आरोप लगा रही हैं। विडंबना है कि प्रदेश के तमाम विवादास्पद मसलों की जांच करने के लिए सीबीआई पर भरोसा करने वाली मायावती को अब इस केंद्रीय जांच एजेंसी की नीयत पर भरोसा नहीं है। उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ इस एजेंसी का इस्तेमाल कर रही है।
बहरहाल, राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं और शायद आगे भी राजनीतिक जरूरतों के अनुसार सत्ता के ‘दोस्त-दुश्मन’ बदलते रहें। लेकिन इस सारी आपाधापी में यदि ‘राजनीतिक विश्वसनीयता’ की तरह ही हमारी राष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ती है तो यह एक स्थाई राष्ट्रीय क्षति होगी। हर हालत में इससे बचा जाना चाहिए।