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Chandigarh Chandigarh पंचकूला. सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट(सीपीडब्ल्यूडी) के वाटर सप्लाई और सीवरेज मैन्युल को मानकर हुडा ने शहर में 20-30 सालों के दौरान स्टॉर्म वाटर की पाइप लाइंस आधा इंच प्रति घंटा बारिश के लेवल की स्पेसिफिकेशंस की बिछरई।
प्रशासन की मानें तो शनिवार शाम एक घंटे में एक इंच (25 एमएम) बारिश हुई। शुक्र है कि तेज बारिश एक घंटा ही हुई। दो-तीन घंटे होती तो जान-माल का नुक्सान कहीं ज्यादा होता। एक बात और साफ हो गई है कि भविष्य में भी शनिवार जैसे या बदतर हालात यहां रहने और आने-जाने वालों को झेलने पड़ सकते हैं क्योंकि अंडरग्राउंड स्टॉर्म वाटर लाइंस तो आसानी से बदली नहीं जा सकतीं। भविष्य में तेज बारिश हुई तो फिर डूब सकता है पंचकूला।
ड्रेनेज सिस्टम फ्लॉप
शनिवार शाम यहां 3.20 से 4.20 बजे तक हुई तेज बारिश में हुडा का बिछाया ड्रेनेज सिस्टम फ्लॉप हो गया था। बारिश रुकने के एक-डेढ़ घंटे बाद तक भी मेन रोड्स नहरों जैसी बनी रहीं।
चौ में ज्यादा पानी उतरा
हुडा के इंजीनियर्स कहते हैं कि बारिश के पानी की धीमी निकासी की एक वजह यह भी है कि सिंहनाला-चौ में ज्यादा पानी उतरा। इस कारण शहर के सेक्टरों का बरसाती पानी ड्रेन आऊट करने के लिए चौ और मनीमाजरा एरिया से जुड़े नाले के साथ अटैच्ड करीब एक दर्जन ड्रेंस भी चोक हो गईं। रोड- गलीÊा ने पानी लेना बंद कर दिया और यह सड़कों पर जमा होता गया।
पंचकूला में तैनात हुडा के सिविल विंग के एक्सईन एन.के. वर्मा, वी.के. कालरा और प्रीतमोहन सिंह के अनुसार स्टॉर्म वाटर पाइप लाइंस इस एरिया में होने वाली औसत बारिश को देखते हुए डिजाइन की गई थीं। ये पाइपें किसी लिहाज से छोटी नहीं पर जिस हिसाब से शनिवार को तेज बारिश हुई, लोगों ने ये पाइपें कुछ घंटों के लिए जरुर छोटी महसूस की होंगी। जितना पानी एक घंटे में बरसा, उसके लिए इनसे बड़ी पाइप लाइंस भी छोटी पड़ जानी थीं।
जहां भी स्टॉर्म वाटर पाइप लाइंस बिछी हैं, शुरु में इनका डाया 14 इंच और टेल एंड पर 72 से 78 इंच तक भी है। इसी तरह सीवरेज लाइंस की चौड़ाई संबंधित एरिया की डिमांड देखते हुए शुरु में 8 इंच और टेल एंड पर 36 इंच तक भी रखी गई है। तीनों एक्सईएन्स मानते हैं कि शनिवार को बारिश लगातार तीन-चार घंटे चलती तो हाल ज्यादा बेहाल होना था।
शहर में नए बसाए जा रहे सेक्टर्स में भी अप्रूव्ड नॉर्म के तहत आधा इंच प्रति घंटा बारिश की स्पेसिफिकेशंस की लाइंस ही बिछाई जा रही हैं। पाइप लाइंस की स्पेसिफिकेशंस बदलने का औचित्य नहीं बनता क्योंकि बारिश कब और कितनी ज्यादा होगी, अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इस एरिया का औसत रेनफॉल 10 एमएम है।
परेशानी लो पलिंथ लेवल वालों की
हुडा के इंजीनियर्स का कहना है कि मकान बनाते वक्त पलिंथ लेवल सड़क के सेंटर लेवल से न्यूनतम डेढ़ फीट ऊंचा रखना चाहिए। इसे कई लोग ढाई फीट तक भी बढ़ा लेते हैं। जिन मकानों का पलिंथ लेवल कम और वे लो-लाइंग एरियाÊा में हैं, उनमें ज्यादा बारिश होने पर पानी घुसने का डर रहेगा।
चौकी डाइवर्शन देगी राहत
चंडीमंदिर साइड से पंचकूला और जीरकपुर के रास्ते घग्घर नदी तक बह रहे सिंहनाला-चौ की चौड़ाई जीरकपुर एरिया में कम होने के कारण शनिवार को पंचकूला एरिया में चौ का पानी बढ़ गया था। अब सरकार चौ को सिंचाई महकमे के जरिये पुराना पंचकूला चौक के पास घग्घर नदी में डाइवर्ट करेगी। इससे अगले साल मानसून में पंचकूला एरिया में कम पानी आएगा। हुडा की चौ के साथ अटैच्ड ड्रेंस भी पूरा पानी ड्रेन आऊट कर पाएंगी। गौरतलब है कि एमडीसी और सेक्टर-7/१८ के रास्ते जीरकपुर एरिया में बह रहे नाले की चौड़ाई भी कम है।
जायजा लिया
हुडा के चीफ इंजीनियर डी.के. सोनी ने रविवार को सेक्टरों में उन जगहों का मुआयना किया जहां शनिवार को बारिश के दौरान बरसाती पानी की निकासी में कुछ कमियां महसूस की गई थीं। उन्होंने सेक्टर-4 में मकान नंबर-1656 के ब्लॉक में चौ तक बनाई गई कच्ची ड्रेन को पक्का करने के आदेश दिए। इस एरिया में नैशनल हाईवे-22 पर बहने वाला पानी सड़क के रास्ते आसपास के घरों को नुक्सान देता है।
हुडा के इंजीनियर्स जल्द देखेंगे कि बारिशों के दौरान हाईवे पर बहने वाले पानी को शहर में आने से कैसे रोका जा सकता है। उन्होंने एक्सईएन एन.के. वर्मा और प्रीतमोहन सिंह के साथ सेक्टर-6, 9, 10, 12, 19 और इंडस्ट्रियल एरिया का भी मुआयना कर कई दिशा निर्देश दिए।रेल ट्रैक तले बने कलवर्ट के रास्ते सेक्टर-19 में घुसने वाले पानी को रोकने पर भी सोच-विचार किया जा रहा है।