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न कर्मचारी न लाइफ गार्ड

चंडीगढ़. forest कहीं हादसों की लेक न बन जाए धनास लेक। न तो यहां फॉरेस्ट विभाग का कोई कर्मचारी तैनात है और न ही कोई लाइफ गार्ड। स्कूल के बच्चे बेधड़क लेक की बाउंडरी पर चढ़कर मस्ती करते हैं।

अब इन्हें कौन समझाए ? ऐसे में जिम्मेदारी तो फॉरेस्ट विभाग की ही बनती है, जिसके अंडर आती है यह लेक। अक्सर लोग भी लेक में कुछ न कुछ डालते नजर आते हैं और लेक की बाउंड्री वॉल फांदकर एन्ट्री करते हैं।

जा चुकी हैं तीन की जान
पिछले साल भी यहां तीन लोगों की डूबकर मौत हो गई थी। और तो और कुछ महीने पहले ही लेक में माइग्रेटरी बर्डस के शिकार का मामला भी सामने आया था। बावजूद इसके फॉरेस्ट विभाग नींद में है।

धनास की पटियाला की राव लेक रिजर्व फॉरेस्ट का हिस्सा है। यहां पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ से चौकीदार तैनात किया गया है। साथ ही फॉरेस्ट गार्ड भी यहां नजर रखते हैं, लेकिन एरिया ज्यादा होने के कारण हर समय मौजूदगी नामुमकिन है। हो सकता है दिन के समय चौकीदार साथ लगते फॉरेस्ट एरिया में गया हो।

लेक से कुछ समय पहले ही दो लाइटें चोरी होने की बात सामने आई थी। सुखना लेक के मुकाबले यहां सुरक्षा के इंजताम कम हैं। धनास लेक पर न तो पुलिस की तरफ से यहां कोई सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
-ईश्वर सिंह, डिप्टी कंर्जवेटर,फॉरेस्ट, चंडीगढ़

गायब हैं सोलर लाइटें
रात के समय लेक को रोशन करने वाली 15 सोलर लाइट्स में अब सिर्फ 13 ही सलामत है। बाकी दो के सिर्फ खंबे रह गए। लेक पर सैर करने वाला सीमेंटिड ट्रैक अब बजरी और रेत में बदलने लगा है। उधर, चंडीगढ़ प्रशासन का कहना है कि धनास लेक डिप्टी कंर्जवेटर फॉरेस्ट के अंडर आती है। इसका सारा रखरखाव का जिम्मा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का ही है।





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