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सो गए भगवान

चंडीगढ़. god देव शयनी एकादशी यानी विष्णु देव के शेष शैया पर सोने की एकादशी। 13 जुलाई से भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेष नाग की शैया पर चार महीने तक के लिए सो गए।

वर्षा ऋतु की समाप्ति पर अब वे शुक्ल पक्ष की देवोत्थानी एकादशी पर 9 नवंबर, 2008 को उठेंगे। यह जानकारी देते हुए उत्तरांचल ज्योतिष कर्मकांड एवं अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष पं. दाता राम मिश्र ने बताया कि इसी समय को चातुर्मास कहा जाता है।

देव शयनी एकादशी पर भक्तों ने भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराकर उनको आसन पर विराजमान करवाया। उसके बाद फलों और पंच मेवा का भोग लगाकर उनकी आरती उतारी। अन्य पूजा कर आशीर्वाद ले भगवान को फूलों की सेज पर सुलाया।

क्या करें
पूजा-पाठ, दान और जाप का यह सबसे अच्छा समय माना जाता है। इन चार महीनों में महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शतचंडी पाठ और नवग्रहों की पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन चार महीनों में किए गए जप तप का और समय के मुकाबले कई गुना अधिक फल मिलता है। इस दौरान ब्रम्हचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।

क्या नहीं
श्री गुग्गा माड़ी मंदिर सेक्टर-20 के मुख्य पुजारी पं. किशोरी लाल ने बताया कि हिंदुओं के ज्यादातर त्यौहार भी इसी अवधि में आते हैं। चातुर्मास में शंकराचार्य एकांतवास में व्रत करते हैं। इस दौरान गृह प्रवेश और गृह आरंभ तो बिलकुल नहीं किया जाता।

चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश

चातुर्मास के उपलक्ष्य में करनाल से र्आई जैन साध्वी अर्चिताजी महाराज ने अपने शिष्यों सहित आज सुबह जैन स्थानक सेक्टर-18 में प्रवेश किया। उनके साथ डालिमा महाराज और परिधी महाराज भी हैं। वे यहां 12 नवंबर तक रहेंगी। इस दौरान वे रोज सुबह 8.15 से 9.15 बजे तक प्रवचन करेंगी। रविवार को सुबह 8.30 से 10.00 बजे तक प्रवचन हुआ करेंगे।

अपने आज के प्रवचनों में उन्होंने लोगों से इन चार महीनों में अधिक से अधिक धार्मिक कार्र्याे में जुटने का आह्वान किया। इस अवसर पर एस.एस. जैन सभा के प्रधान भूषण जैन और मंत्री सुरेश जैन ने गुरु महाराज के जैन स्थानक में प्रवेश का स्वागत किया। जैन विजन डॉट कॉम के संचालक नीरज जैन, राधेश्याम जैन, पवन कुमार जैन, नरेश जैन, संदीप, श्रीपाल और सुधीर जैन ने अर्चिता महाराज को सफल चातुर्मास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।





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