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पृथ्वी जैसी घूमेगी सांईबाबा की मूर्ति

इंदौर. सतना में संगमरमर के पत्थरों पर इंदौर के रचनाकार द्वारा रचित सांई चरित्र उकेरा जाएगा। यहीं नहीं मंदिर भी बनेगा जिसमें सांईबाबा की मूर्ति अपने स्थान पर घूमती नजर आएगी। 24 घंटे में मूर्ति एक चक्कर लगाएगी। मंदिर को सप्तदलीय पुष्प की डिजाइन में बनाया जाएगा। इसमें काव्यग्रंथ के सात खंडों के 2711 दोहे समाहित किए जाएंगे।

सांई बाबा के अनन्य भक्त शिवनारायण टुवानी ने काव्यग्रंथ सांई सच्चरित्र को दोहे के रूप में करीब तीन साल पहले लिखा था। उन्होंने इसके लिए बाकायदा सांईबाबा पर आधारित सभी पहलुओं पर शोध किया। अब इसे सतना के मंदिरों में पत्थरों पर दोहों को उकेरा जाएगा। मंदिर का नाम भी उनके काव्यग्रंथ के नाम पर सांई सच्चरित्र सार मंदिर रखा जा रहा है। मंदिर 116 फीट लंबा और इतना ही चौड़ा बनेगा। मंदिर में सात कोणों से लगे हुए सात कमरे बनाए जाएंगे जिनकी दीवारों पर दोहे होंगे।

श्री टुवानी ने बताया सतना जिले के पास कटकोन कलां गांव में ठाकुर उमेशप्रतापसिंह द्वारा दी गई 5 एकड़ जमीन पर 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत पर मंदिर बनेगा।

मंदिर के आर्किटेक्ट इंदौर के सुरेंद्र बजाज हैं, जो नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं। चेन्नई की एक साफ्टवेअर कंपनी के संचालक सी.वी. रमानी ने प्रारंभिक तैयारी के लिए एक लाख का ड्राफ्ट भी सहयोग स्वरूप भेज दिया है। जल्द ही श्री रमानी इंजीनियरों को एक दल सतना भेजेंगे और फिर मंदिर की डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

‘दर्शन कई स्वरूप में मंदिर कई हजार
सतना के प्रवेश मार्गो पर सात द्वार बनाए जाएंगे, जिन पर भी सांई सच्चरित्र सार का दोहा लिखा जाएगा। यह दोहा होगा- ‘दर्शन कई स्वरूप में मंदिर कई हजार, किंतु फकीरा रूप में दर्शन पहली बार।’

शिर्डी में गुरुपूर्णिमा पर होगा टुवानी का सम्मान
सांई बाबा के जीवन पर आधारित काव्य ग्रंथ श्री सांई सच्चरित्र सार लिखने वाले शहर के कवि शिवनारायण टुवानी का गुरुपूर्णिमा के मौके पर 18 जुलाई को शिर्डी में समाधि मंदिर में सांई बाबा संस्थान द्वारा सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही उनके काव्यग्रंथ की सीडी का विमोचन भी किया जाएगा।

यह सीडी तीन भागों में तैयार की गई है, जिसमें पुणो की ख्यात गायिका ज्योत्स्ना गनफुले ने स्वर दिए हैं। इसके पहले भी यहां श्री टुवानी का दो बार सन् 2006 और 2007 में गुड़ी पड़वा के अवसर पर सम्मानित किया जा चुका है। देश के कई मंदिरों में और घरों में ग्रंथ का संगीतमय पारायण किया जा रहा है।





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