बाबूलाल गौर जब से मुख्यमंत्री से काबिना मंत्री बने, उसके बाद पहली बार इंदौर में पूर्व मुख्यमंत्री के नाते पूरा कारकेड मिला। इससे पहले वे जब भी काबिना मंत्री के नाते आए पुलिस का फॉलो ही मिलता रहा, जिसमें एसएएफ का एक-चार का गार्ड रहता है।
शुक्रवार को वे शादी सहित विभिन्न निजी आयोजनों में भाग लेने पहुंचे तो कारकेड में पायलट, अन्य वाहनों के साथ एक राजपत्रित अधिकारी भी तैनात थे। इसे देख उनके विभाग के अफसर भी चकित थे। उनका महत्व यकायक बढ़ने का कारण बताने को कोई तैयार नहीं। दबी जुबान से यह चर्चा जरूर चलती रही कि नवागत कलेक्टर-एसपी की रुचि के कारण ऐसा हो सकता है।
कौन बनेगा चीफ इंजीनियर
प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर पी.के. मिस्त्री के निधन से रिक्त पद को लेकर अधीक्षण यंत्री वी.के. गंगवाल, कार्यपालन यंत्री के.के. माहेश्वरी और पी.सी. बापना मैदान में हैं। उच्च स्तर से छनकर आ रही बातों के मुताबिक वरिष्ठता और अनुभव के क्रम में श्री माहेश्वरी सबसे ऊपर हैं। प्राधिकरण के शीर्ष पदाधिकारी और अधिकारी भी उन्हें चाहते हैं। श्री गंगवाल अच्छे इंजीनियर हैं लेकिन वरिष्ठता में पीछे हैं। बचे श्री बापना, तो उनकी कार्यप्रणाली को लेकर उच्च अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। इस बीच सभी इंजीनियरों को अपने टीम लीडर का इंतजार है।
तबीयत या..
आखिरकार डॉ. सी.वी. कुलकर्णी की एमवायएच अधीक्षक के पद से विदाई हो ही गई। हालांकि चर्चाएं पहले भी कई बार चलीं कि वे पद छोड़ने वाले हैं, लिखकर भी दे चुके लेकिन थोड़े दिन की छुट्टी के बाद वे फिर काबिज हो जाते। कभी मार्च में काम बोझ तो कभी कोई और बहाने से। वैसे घोषित तौर पर वे हमेशा इस बात का विरोध करते रहे कि मैं पद छोड़ रहा हूं। इस बार पता नहीं कैसे कार्रवाई अंजाम तक पहुंच गई। यह सवाल एमवायएच में सभी एक-दूसरे से पूछ रहे हैं, खासकर उनकी मैराथन छुट्टियों के दौरान प्रभारी रहे डॉ. जी.एस. पटेल और डॉ. वी.एस. भाटिया।
कफ्यरू ने कराई सादी शादियां
शहर का कफ्यरू कई शादियों की धूमधाम लील गया। बैंडबाजे नहीं आने से दुल्हन की बहनों और दूल्हे के मित्रों ने प्लेट और चम्मच बजाकर डांस किया। घोड़े भी नहीं मिले और दूल्हों को गार्डन और धर्मशालाओं के अंदर ही थोड़ा पैदल चलकर बाना निकालना पड़ा। यह सब देख कई बुजुर्गो ने कहा हमने भी कभी इतनी ‘सादी’ शादियां नहीं देखीं।
हनुमान दर्शन के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश
शुक्रवार को समाज कल्याण परिसर में सरकारी सामूहिक विवाह हुए। इस दौरान दोपहर को विदाई के दौरान वर-वधुओं को परिजन परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर दर्शन कराने ले गए। तभी वहां से निकल रहे एक बुजुर्ग पंडित ने कहा गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहे हैं और दर्शन चिर ब्रrाचारी (हनुमानजी) के।
क्राइम ब्रांच भी ‘दंगा पीड़ित’
उपद्रव और कफ्यरू से शहरवासी तो त्रस्त हुए ही ‘राजशाही’ काम करने वाली क्राइम ब्रांच भी दिन-रात की ड्यूटी के जाल में फंसकर ‘दंगा पीड़ित’ हो गई। डीएसपी क्राइम ठीक से ऑफिस की शक्ल नहीं देख पाए, वहीं विशेष दर्जा रखने वाले उनके मातहत अरसे बाद वर्दी में पाइंट ड्यूटी करते नजर आए। ब्रांच ने काफी समय से चेन लुटेरों का एक गिरोह पकड़ रखा था। सोचा था माल बरामद होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शाबाशी बटोरेंगे, लेकिन दंगों के चक्कर में यह उपलब्धि भी दबी रही। अंतत: एसपी ने फटकारा तब धीरे से जानकारी औपचारिक तौर पर लीक की गई।
टली दो अधिकारियों की बलि
इंदौर के तनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री अधिकारियों पर जमकर बरसे। इसके बाद भोपाल में बैठे आला अधिकारियों ने बलि का बकरा चुनने की प्रक्रिया शुरू की। चूकि कलेक्टर-एसपी नए थे इसलिए दो अन्य अधिकारियों के नाम तय हुए। उनका तबादला तय था। अतिरिक्त मुख्य सचिव विनोद चौधरी ने इंदौर आकर इस निर्णय के पक्ष में कुछ तैयारियों भी कर ली थी। आखरी समय एक पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने यह निर्णय बदलवा दिया।
रेंजर की घुट्टी, मंत्री की छुट्टी
एक रेंजर ने वनमंत्री विजय शाह को ऐसी घुट्टी पिलाई है कि भोपाल के अधिकारी भी उन्हें हाथोहाथ ले रहे हैं। बाकी लोग यह तलाश रहे हैं कि रेंजर ने ऐसी क्या घुट्टी पिलाई जिससे मंत्री बार-बार शनिवार-रविवार मनाने इंदौर आ जाते हैं। उधर काफी पहले तबादला होने के बाद भी रेंजर को रिलीव नहीं किया जा रहा है। हालांकि उस पर कई घोटालों के आरोप हैं।
तबादले का ठेका
विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी निगम के अधिकारियों की तबादला सूची में किसका नाम हटाना है किसका बढ़ना है इसका अधिकार एमआईसी की महिला सदस्य के पति और उनके मित्र के पास सुरक्षित है। इसकी भनक लगते ही अपर आयुक्त से लेकर बड़े-बड़े इंजीनियर भी उनके चक्कर काट रहे हैं। जानकारी तो निगम के हर अधिकारी और कर्मचारी को है लेकिन बगैर सबूत के अंगुली उठाने में सभी डरते हैं।
कमाई यहां, क्यों जाएं वहां
राज्य सरकार द्वारा जारी मूल विभाग में वापसी के आदेश और निगम प्रशासन द्वारा सेवामुक्त किए जाने के बाद भी कई अधिकारियों ने मूल विभाग में ज्वॉइन नहीं किया। इनमें एक उपायुक्त और एक इंजीनियर तो तबादला निरस्त करवाकर दोबारा फिर यहीं जमे रहने को लालायित हैं। हो भी क्यों न? यहां मूल विभाग के मुकाबले वेतन भी ज्यादा और बाकी आमदनी बेहिसाब।
क्या सोचा महापौर मान जाएंगी?
लोक निर्माण मंत्री और महापौर के बीच जारी टसल का फायदा उठाने पहुंचे विधानसभा-२ से ताल्लुक रखने वाले सिक्ख समाज के लोगों को महापौर निवास से निराश लौटना पड़ा। ये लोग नंदानगर अधोसंरचना विकास के तहत बनने वाली उस सड़क का रुख बदलवाना चाहते थे जिसके निर्माण से पाटनीपुरा गुरुद्वारा का अवैध निर्माण टूटना तय है। महापौर उनके मंसूबों पर पानी फेरते हुए बोलीं विकास के मुद्दे पर मेरा किसी से कोई मतभेद नहीं। आपका निर्माण सड़क में बाधक है स्वयं तोड़ना ज्यादा फायदेमंद होगा।
- मांगीलाल चौहान, अमित मंडलोई, मुनीष शर्मा,शैलेंद्र जोशी, अमित जलधारी, सुनील हजारी,विनोद शर्मा, दीपेश शर्मा