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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
राशन की कालाबाजारी करने वालों पर प्रशासन का खौफ नहीं बन पा रहा है। इस वर्ष सात महीनों में 1030 दुकानों में से 19 में अनियमितता पकड़ी गई और केवल एक दुकान के संचालक के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई। इसी तरह ढाई साल के दौरान छापामार कार्रवाई में सामने आए केवल 9 मामलों में एफआईआर हुई। बड़े प्रकरणों में 11 लाख 30 हजार रुपए राजसात किए गए।
जिले में शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों में जो सामान गरीबों के लिए दिया जाता है, वही सामान डेढ़-दो गुनी दर पर बाजार में भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। मैदानी अमले की कमी और पुलिस के असहयोग के चलते पर्याप्त छापामार कार्रवाई नहीं हो पाती और शहर ही नहीं, बल्कि जिले में कालाबाजारियों के हौसले बुलंद हैं। खाद्य महकमे में लंबित मामलों का पहाड़ सा खड़ा हो गया है। राशन दुकानों में अफरातफरी पर जनवरी से जून तक जितने मामले दर्ज किए गए, उनमें से एक चौथाई का भी निराकरण नहीं हो सका।
मसलन, अप्रैल में 27 मामले लंबित थे, निपटारा केवल एक का हुआ। इसी तरह मई व जून में निराकृत मामलों की संख्या क्रमश: एक व दो रही। नगर निगम सीमा में जांच का जिम्मा केवल एक फूड इंस्पेक्टर को दिया गया है। समय-समय पर छापामार कार्रवाई करने के लिए दूसरे ब्लाकों से फूड इंस्पेक्टर बुलाए जाते हैं।
ढाई साल में सिर्फ 26 के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर
ऐसा नहीं है कि कालाबाजारियों तक महकमे के हाथ नहीं पहुंचते। पिछले ढाई वर्षो में छापामार कार्रवाई के दौरान खाद्यान्न व केरोसिन की कालाबाजारी के 156 मामले पकड़े गए, लेकिन इनमें से केवल 9 मामलों में ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, वहीं न्यायालय तक एक भी मामला नहीं पहुंचा। दर्ज कराए गए प्रकरणों में कुल 26 लोग आरोपी बनाए गए हैं।
जनवरी 06 से अक्टूबर 07 तक केरोसिन की कालाबाजारी के 90 मामले पकड़े गए। ताज्जुब की बात है कि इनमें से एक भी मामले में एफआईआर नहीं हुई। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह चावल की कालाबाजारी करने पर सीधे जेल भेजने की बात कई बार कह चुके हैं, लेकिन अब तक जिले में ऐसा कोई मामला नहीं बना है, जिसमें आरोपी को सजा मिली हो। कालाबाजारी के काले धंधे में शहर के कई नामी-गिरामी लोग भी शामिल हैं, जिनके अड्डों से इस धंधे की मानिटरिंग होती है। एप्रोच के चलते इनपर हाथ डालने से विभागीय अधिकारी भी कतराते हैं।
वर्षो पुराने मामले भी लंबित: खाद्यान्न व केरोसिन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कलेक्टर कोर्ट में चल रहे मामलों की फेहरिस्त भी बड़ी लंबी है। यहां जनवरी 2006 से अक्टूबर 2007 तक दर्ज मामलों में से 29 मामले अभी तक लंबित हैं। इस अवधि के बाद पेंडिंग मामलों की संख्या में और भी इजाफा हो चुका है। वर्तमान में यह आंकड़ा 60 पार कर गया है।
3 दुकानें निलंबित, 9 निरस्त: ग्राम पंचायत स्तर पर खाद्यान्न व करोसिन की अवैध बिक्री के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। जनवरी से 30 जून तक की अवधि में जिले में केवल 12 शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकानों में अनियमितता उजागर हुई। इनमें से तीन राशन दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं, वहीं निरस्त दुकानों की संख्या 9 है। इन दुकानों से 1.25 क्विंटल खाद्यान्न जब्त किया गया। ब्लाकों में पर्याप्त मानिटरिंग न होने के कारण अनेक मामले प्रशासन की नजर में ही नहीं आते। दुकानों को निलंबित व निरस्त करने की कार्रवाई एसडीएम स्तर पर की जाती है।
राजसात की कार्रवाई से लाखों की कमाई: ढाई वर्षो में दर्ज प्रकरणों में वाहनों के एवज में राजसात की कार्रवाई कर शासन के खजाने में लाखों रुपए जमा किए जा चुके हैं। मिट्टी तेल व चावल, गेहूं परिवहन करते पकड़े गए दर्जनों वाहनों की कीमत के रूप में 11 लाख 30 हजार रुपए राजसात किए गए। लेकिन इसके बाद भी कालाबाजारियों के हौसले बुलंद हैं।
सर्वाधिक कालाबाजारी चावल व केरोसिन की: अब तक कालाबाजारी के जितने भी मामले पकड़े गए, उनमें दूसरे खाद्यान्न की अपेक्षा चावल और केरोसिन अधिक पैमाने पर जब्त किया गया। नवंबर से अब तक केवल छोटे मामलों में 600 क्विंटल चावल जब्त किया जा चुका है। इसी तरह केरोसिन का आंकड़ा 18 हजार 210 लीटर है।
यूं होता है बड़ा घाला: करीब तीन माह पहले लाखों रुपए के खाद्यान्न के अवैध परिवहन ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पोल खोलकर रख दी थी। नागरिक आपूर्ति निगम के जयराम नगर स्थित गोदाम से चावल व खाद्यान्न लेकर मस्तूरी के पास भटचौरा के लिए निकला ट्रक वहां न जाकर अकलतरा के पास चोरभट्ठी पहुंच गया था। यही नहीं, वहां के राइस मिल में चावल अनलोड भी किया जा रहा था कि ऐन वक्त पर अधिकारी पहुंच गए और गड़बड़ी उजागर हो गई। इस प्रकरण का आरोपी ट्रक ड्राइवर हफ्ते भर पहले शहडोल में एक अन्य प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, जिसे बाद में यहां लाया गया।
नहीं मिलता पुलिस का सहयोग
शहर या आसपास अब तक जितने स्थानों पर छापा मारा गया, वहां पुलिस या तो पहुंची ही नहीं या फिर पहुंची तो देर से। कई बार ऐसा भी हुआ, जब पुलिस को मौके पर बुलाने के लिए उच्चधिकारियों से शिकायत करनी पड़ी।
कलेक्टर, एडिशनल कलेक्टर के आदेश के बाद पुलिस वहां पहुंची। विशेषकर तारबाहर क्षेत्र में कालाबाजारियों पर कार्रवाई करना जान जोखिम में डालने का काम है। कुछ माह पहले छापे के दौरान यहां अज्ञात लोगों के पथराव और गाली-गलौज से दस्ते को दो-चार होना पड़ा था। ऐसी जगहों पर पुलिस की कमी महसूस होती है।
आयल डिपो होने के कारण तारबाहर और व्यापार विहार इलाके में हर माह हजारों लीटर केरोसिन की अफरातफरी हो रही है। इस धंधे में कुख्यात गिरोह का हाथ है, जिससे प्रशासन भी हार गया है।
सभी मामले एफआईआर दर्ज कराने के लायक नहीं होते। जरूरत पड़ने पर गंभीर मामला पुलिस को सौंपा जाता है। खाद्य विभाग द्वारा सतत् मानिटरिंग करने के साथ ही दोषियों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
—सुबोध कुमार सिंह, कलेक्टर
शासकीय खाद्यान्न की गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग द्वारा हरसंभव कोशिश की जाती है। समय-समय पर छापामार कार्रवाई कर आरोपियों के खिलाफ प्रकरण बनाए जाते हैं और प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किए जाते हैं। प्रत्यक्ष अपराध साबित होने से उनके आदेश पर रिपोर्ट लिखाई जाती है।
—आरएस ठाकुर, सहायक खाद्य अधिकारी