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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. एक ओर खेलों को समाज और सरकारों द्वारा खास महत्व दिया जा रहा है, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा जिले के छात्र-छात्राओं के लिए अलग से बजट स्वीकृत नहीं हैं । बल्कि जिला और संभागीय प्रतियोगिताएं केवल छात्र-छात्राओं की फीस के दम पर ही आयोजित की जा रही हैं। बजट का यह अभाव पिछले पांच साल से चला आ रहा है।
आंकडे बताते हैं कि कक्षा नौ एवं दस के छात्र साढ़े तेरह रुपए में और 11 वीं एवं 12 वीं के छात्र केवल साढ़े 22 रुपए में सालभर अपनी ही फीस से खेलते हैं और तमाम प्रयिोगिताओं में भाग लेते हैं। गौरतलब है कि पिछले सत्र में कक्षा नौ से 12 वीं तक के करीब दो हजार छात्रों ने जिले की खेल गतिविधियों में भाग लिया था।
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से जिले के करीब 650 छात्र-छात्राओं ने संभागीय खेल स्पर्धाओं में भाग लिया था और इस प्रतियोगिता को जीतकर सवा दो सौ प्रतिभागी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं पहुंचे थे। खेलों में इतना अच्छा प्रदर्शन होने के बाद भी जिले की खेल प्रतिभाओं को प्रदेश सरकार द्वारा अलग से खेल राशि जारी नहीं की जा रही, इसलिए जिले का खेल विभाग खेल के लिए पैसों की कमी से जूझ रहा है।
हैरानी की बात तो यह है कि जिले के इन छात्रों पर जो राशि खर्च की जा रही है, वह छात्रों से ही वसूली जा रही है। जिला क्रीड़ा विभाग के आंकड़े गवाह हैं कि क्रीड़ा शुल्क के नाम पर कक्षा नौ से दस तक के छात्रों से 13 रुपए 50 पैसे लिए जाते हैं, वहीं कक्षा 11वी से 12 वीं तक के छात्रों से यह शुल्क 22 रुपए 50 पैसे लिया जाता है। इस लिहाज से देखा जाए तो कक्षा नौ और दसवीं के छात्र केवल साढ़े तेरह रुपए में साल भर खेलते हैं और कक्षा 11 एवं 12 के छात्र-छात्राएं साढ़े 22 रुपए में सालभर की खेल गतिविधियों में भाग लेते हैं और इन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती।
जेडी कार्यालय भी भेजनी पड़ती है राशि
जिला क्रीड़ा अधिकारी एमएस तोमर ने खेलों के लिए धन की कमी महसूस करते हुए कहा कि पिछले पांच साल से खेलों के लिए अतिरिक्त राशि नहीं मिली। उनका कहना है कि क्रीड़ा शुल्क में से 20 फीसदी राशि शिक्षा विभाग के संभागीय कार्यालय भेजनी पड़ती है, जिससे प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया जाता है।