अजमेर. टैक्स बोर्ड में सरकारी वकील का पद गत 14 साल से रिजर्व है। इस पद पर नियुक्त वकील का कार्यकाल बढ़ाते-बढ़ाते कब वे अधिकतम आयु सीमा पार कर गए, यह शायद महकमे को भी नहीं मालूम। टैक्स बोर्ड में वकील आरके अजमेरा की नियुक्ति करीब 14 साल पहले हुई थी।
नियुक्ति के लिए 9 मार्च 1993 को वाणिज्यिक कर विभाग ने विज्ञप्ति जारी की थी। शर्र्तो में साफ था कि नियुक्ति प्रारंभ में एक साल के लिए और फिर कार्य संतोषप्रद होने पर एक बार में एक वर्ष की वृद्धि की जाएगी और 60 साल की आयु होने के बाद सेवा वृद्धि नहीं होगी,लेकिन सरकार और विभाग द्वारा इतने साल बाद भी वकील अजमेरा को ‘सेवा’ मौका दिया जा रहा है। अजमेरा की उम्र 67 वर्ष है।
टैक्स बोर्ड में अजमेर मुख्यालय और जयपुर बेंच के लिए दो-दो वकील हैं। यहां वकील अजमेरा 14 साल से काबिज हैं वहीं दूसरे पद के लिए रस्साकशी चलती रहती है। टैक्स बोर्ड से जुड़े वकीलों की मानें तो इतने सालों में दोबारा भर्ती के लिए विज्ञापन ही जारी नहीं किया। कुछ वकीलों ने अर्जियां भेजीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग के उपशासन सचिव की ओर से कई बार सरकारी वकीलों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाता है। जबकि नई नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए। इधर विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि इसमें विभाग का कोई लेना देना नहीं है। अजमेरा मानते हैं कि 60 साल की उम्र का कोई नियम नहीं है। योग्यता और अनुभव के आधार पर कार्यकाल बढ़ा है।
यहां लागू नहीं..
सरकारी वकीलों के लिए ‘राजस्थान लॉ एण्ड लीगल अफेयर्स डिपार्टमेंट मैन्युअल 1999’ के तहत फीस और भत्ते तय हैं। लेकिन टैक्स बोर्ड में इस कानून की पालना नहीं की जाती। वाणिज्यिक कर विभाग ने टैक्स बोर्ड के सरकारी वकीलों के लिए अपने स्तर पर पारिश्रमिक तय किया हुआ है। गौरतलब है कि इस कानून के तहत 7 जनवरी को सरकार ने पारिश्रमिक रिवाइज किए थे और इसे लगभग तिगुना कर दिया गया था, लेकिन टैक्स बोर्ड में पिछले कई सालों से प्रतिमाह केस के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है।
>> अदालतों में डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट को नौ हजार रुपए प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जाता है। ड्राफ्टिंग और सेटलिंग चार्जेज के चार सौ रुपए प्रति केस तय हैं। >> टैक्स बोर्ड में डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट को 750 रुपए प्रति केस दिया जाता है। यानि प्रतिमाह फिक्स राशि नहीं दी जाती।
रेवेन्यू बोर्ड की तरह..
वकीलों का मानना है कि टैक्स बोर्ड का गठन रेवेन्यू बोर्ड का क्षेत्राधिकार कम कर किया गया था। अब स्टांप एक्ट और एक्साइज एक्ट के मामलों की सुनवाई भी टैक्स बोर्ड को सौंप दी गई है।
ऐसे में सरकारी वकीलों की नियुक्ति से लेकर बोर्ड के क्रियाकलाप में एकरूपता के लिए जरूरी है कि रेवेन्यू बोर्ड में नियुक्त किए जाने वाले सरकारी वकीलों की तरह ही टैक्स बोर्ड में भी नियुक्ति हो। रेवेन्यू बोर्ड में सरकारी वकील के लिए एलआर एक्ट के तहत नियम है और 60 साल व इससे ज्यादा उम्र होने पर सरकारी वकील के पद पर नहीं रह सकते हैं।
सरकारी वकील की नियुक्ति सरकार करती है और सरकार ही इस बारे में सही स्थिति बता सकती है।
-मुकेश शर्मा, कमिश्नर, वाणिज्यिक कर विभाग
मामले को दिखवा रहा हूं, पूरी जानकारी मिलने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
-एस.आर. कटारिया, एडिशनल कमिश्नर (विधि), वाणिज्यिक कर विभाग
60 साल का कोई नियम नहीं है, माणकचंद जी को 72 साल की उम्र में नियुक्त किया था। कुछ लोग झूठी शिकायतें कर रहे हैं। मेरे काम को देखते हुए सरकार कार्यकाल बढ़ा रही है।
-आर.के. अजमेरा, उप राजकीय, अभिभाषक, टैक्स बोर्ड