अजमेर. दाखिले के दोहरे मापदंड के कारण राज्य के बीपीएड कॉलेजों में तय सीटों के मुकाबले केवल 23.86 फीसदी विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिल सका है। इस बार सरकार की केन्द्रीयकृत प्रवेश व्यवस्था के दायरे में शामिल इन कॉलेजों में जिला स्तर के खिलाड़ियों को प्रवेश का लाभ नहीं मिल सका है।
राज्य के शारीरिक शिक्षा कॉलेजों के संचालक पसोपेश में हैं। सरकार की दोहरी नीतियों के कारण जहां स्वायत्तशासी के रूप में संचालित कॉलेजों में तय सीटें भर चुकी हैं, जबकि जोधपुर राजकीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय की केन्द्रीयकृत प्रवेश व्यवस्था से जुड़े अन्य दस कॉलेजों में तय सीटों के मुकाबले अब तक 23.86 फीसदी ही भर सकी हैं।
इन कॉलेजों में सरकार ने कुल 750 सीटें आवंटित की हैं। जोधपुर कॉलेज ने 219 विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए भेजा था। इनमें से भी 40 विद्यार्थियों ने कॉलेजों में प्रवेश लेना मुनासिब नहीं समझा।
नतीजा यह है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब तक केवल 179 विद्यार्थी प्रवेश ले सके हैं। काउंसलिंग के बाद उदयपुर बीपीएड कॉलेज में प्रवेश के लिए चार विद्यार्थियों की सूची भेजी गई। इनमें से एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया, जबकि सूरोठ कॉलेज में 60 सीटों के मुकाबले एक, बारां में 60 के स्थान पर तीन, भिंडर व जामडोली कॉलेज में 8-8 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
बैरंग लौटाया
एक ओर बीपीएड कॉलेज में तय सीटें भरने के टोटे पड़ रहे हैं। दूसरी ओर काउंसलिंग के दौरान उन 188 विद्यार्थियों को बैरंग लौटा दिया गया, जिनके परीक्षा परिणाम विभिन्न विश्वविद्यालय घोषित नहीं कर सके हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय और बीएन कॉलेज उदयपुर में जिला स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को प्रवेश मिल गया है।
बीपीएड कॉलेजों की स्थिति बड़ी खराब है। कोटा व राजस्थान विश्वविद्यालय के परिमाण देरी से आए। इसकी वजह से 166 पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल सका। साठ सीटें आवंटित हैं, जिसके मुकाबले अब तक एक विद्यार्थी ने प्रवेश लिया है।
सुदेश शर्मा, प्राचार्य, बीपीएड कॉलेज, सुरोठ
केन्द्रीयकृत प्रवेश व्यवस्था में जिला स्तर के खिलाड़ियों को अयोग्य मानने के कारण बीपीएड कॉलेजों में इस बार आवंटित सीटें तक नहीं भर सकी हैं। जबकि स्वायत्तशासी कॉलेजों में जिला स्तर पर खेले विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है।
दशरथ पारीक, प्राचार्य, सनातन धर्म बीपीएड कॉलेज, केकड़ी
बीपीएड में प्रवेश के दोहरे नियमों को लेकर सरकार से पूर्व में भी मांग की जा चुकी है। शिक्षा परिषद में भी राज्य स्तरीय खिलाड़ियों की पात्रता तय नहीं है। स्वायत्तशासी कॉलेज व अन्य राज्यों में जिला स्तर पर खेलने वालों को भी प्रवेश दिया जाता है।
अतुल दुबे, प्राचार्य, बीपीएड कॉलेज भीलवाड़ा