उदयपुर. सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में रोस्टर प्रणाली का भी उल्लंघन हुआ। भर्ती में रोस्टर के मुताबिक आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के पद ही उड़ा दिए गए।
2007 में लॉ कॉलेज में चार पदों पर भर्ती की गई। पहले तो स्वीकृत दो पदों के विरुद्ध चार की भर्ती की गई, दूसरा चार पदों पर भर्ती में भी आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ।
लॉ कॉलेज में जिन चार अभ्यर्थियों की भर्ती की गई उनमें तीन पर सामान्य व एक ओबीसी (यह अभ्यर्थी राजस्व मंत्री रामनारायण डूडी की भतीजी राजश्री चौधरी है जिसका सामान्य श्रेणी में आवेदन होने के बादजूद इसे नियम विरुद्ध ओबीसी के कोटे में भर्ती किया) का है। रोस्टर के अनुसार बेकलॉग के आधार पर इसमें से एक पद एससी व एक पद एसटी का होना चाहिए था।
ऐसे बनते हैं एससी, एसटी के पद : विश्वविद्यालय में 1984 से आरक्षण व्यवस्था लागू की गई। उस समय की रोस्टर प्रणाली के अनुसार पहला पद अजा व दूसरा पद पद जजा के लिए आरक्षित था, लेकिन तब हुई भर्ती में इस वर्ग से नियुक्ति नहीं हो पाई। तब से यह अजाजजा वर्ग के दोनों पद बेकलॉग श्रेणी में चल रहे थे।
पिछले साल हुई भर्ती में यह बेकलॉग पद शामिल किए जाने चाहिए थे, लेकिन विवि प्रशासन ने चतुराई के साथ दो पदों का ही विज्ञापन किया और चार की भर्ती कर ली। यदि चार का विज्ञापन किया जाता तो उसमें बेकलॉग दोनों पदों का भी उल्लेख करना पड़ता। ऐसा करने पर न तो मंत्री की भतीजी और न सलेक्शन कमेटी के पदाधिकारियों के अन्य चहेतों की भर्ती हो पाती।
इस मामले में राज्य सरकार को शिकायत भी की गई है। सुविवि अजाजजा छात्र संगठन के संरक्षक डॉ. वेलाराम घोघरा का तो कहना है कि यूनिवर्सिटी में रोस्टर ही संधारित नहीं है।आरक्षण नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। इस संबंध में उच्च शिक्षा सचिव से लेकर, कुलपति राजेश्वरंिसंह तक को अवगत कराया गया था जिन्होंने जांच का आश्वासन दिया था।
मुझे रोस्टर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लॉ कॉलेज में जब भर्ती हुई थी तब डिप्टी रजिस्ट्रार कोई और था। इस संबंध में कुछ भी बोलने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं।
-केसी गोयल, डिप्टी रजिस्ट्रार