HomeBusinessCorporate Corporate

अमर की मांग, मुकेश मुश्किल में

नई दिल्ली.कई दिनों से अमर सिंह के निशाने पर चल रहे रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि ‘विंडफाल प्राफिट टैक्स’ (डब्ल्यूपीटी) से पेट्रोरसायन उद्योग को भारी नुकसान होगा।

सरकार को हाल ही में समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह निजी पेट्रो रिफाइनरी पर विंडफाल गेन टैक्स लगाने और उनका ‘एक्सपोर्ट दर्जा’ खत्म करने की मांग करते रहे हैं। अमर सिंह मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी के मित्र हैं और उनकी मांग को अंबानी भाइयों की प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देखा जा रहा है। इसकी वजह से मुकेश अंबानी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

मुकेश अंबानी ने उच्च अधिकारियों से भेंट कर सोमवार को दिन की शुरुआत की। वह सबसे पहले कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर से मिले और उन्हें हालात की जानकारी दी। इसके बाद वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुंचे।

सोनिया से भी मिले!

कहा जा रहा है कि मुकेश अंबानी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी भेंट कर उन्हें निजी तेल कंपनियों के विरुद्ध किए जा रहे दुष्प्रचार की जानकारी दी है।

मुकेश की दलीलें

१. अस्थिर अर्थव्यवस्था को न्यौता

डब्ल्यूपीटी से अल्पावधि में तो सरकार का राजस्व थोड़ा बढ़ जाएगा, लेकिन इसके कारण अर्थव्यवस्था में आई अस्थिरता लंबे समय तक रहेगी।

२) निजी तेल कंपनियां ही क्यों

सभी सेक्टर ‘बूम’ के दौरान मुनाफा कमाते हैं, लेकिन हर बार डब्ल्यूपीटी जैसे टैक्स पर विचार नहीं किया जाता। (मुकेश ने 90 के दशक में आए आईटी बूम का हवाला दिया।)

३) गैर-तेल कंपनियों पर कितना जायज

प्राकृतिक संपदा का दोहन करने वाली गैर तेल कंपनियां भी ग्लोबल कमोडिटी बूम से लाभांवित हुई हैं। क्या इन पर डब्लयूपीटी लगाना न्यायसंगत है?

४) बढ़ चुकी है लागत

क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल के एक्सप्लोरेशन व डवलपमेंट पर आने वाला खर्च तीन गुना तक बढ़ चुका है।

डब्ल्यूपीटी के संभावित नुकसान

-उत्पादन लागत में वृद्धि संभव।

-घरेलू तेल उत्पादन घट सकता है।

-तेल का आयात व इस पर होने वाले खर्च में भारी इजाफा हो सकता है।

क्या है विंडफाल प्राफिट टैक्स?

कंपनियों के वास्तविक मुनाफे अथवा मुनाफे के मार्जिन पर लगाए जाने वाले टैक्स को विंडफाल प्राफिट टैक्स कहते हैं।

मुनाफे पर आधारित : इस सूरत में कैपिटल इनवेस्टमेंट, एसेट बेस जैसे मापदंडों पर विचार करना जरूरी है।

मार्जिन पर आधारित : मुनाफे के मार्जिन पर टैक्स लगाते समय दूसरे व्यवसायों के मार्जिन को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: