Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.
सितारे की सफल छवि उसके लिए सिक्के की तरह हो जाती है। परंतु दूसरे लोग उसे भुनाने की कोशिश करते हैं तो खोटे सिक्के की तरह अपनी असलियत पर लौट आते हैं। हरमन बावेजा देखने में ठीक लगते हैं और अभिनय भी काम चलाऊ कर लेते हैं। परंतु पहली फिल्म ‘टाइम मशीन’ की अवधारणा होने के कारण दर्शर्को को अच्छी नहीं लगी। हरमन ने रितिक रोशन की शैली में नृत्य प्रस्तुत किए जिसे दर्शक ने नकार दिया। हर नए कलाकार को अपनी शैली में प्रस्तुत होना चाहिए। इमरान ने मामू आमिर की नकल नहीं की, वे सफल रहे। यह संभव है कि लंबी दौड़ में हरमन कामयाब हों। परंतु ‘लव स्टोरी 2050’ के पिटने के बाद अभी तो उनकी निर्माणाधीन दो फिल्मों में पूंजी निवेशक का रुपया आठ आने का हो गया है।
मनमोहन शेट्टी की हरमन अभिनीत ‘विक्ट्री’ प्रदर्शन के लिए तैयार हो रही है। यह पहली भारतीय क्रिकेट फिल्म है जिसकी शूटिंग में ऑस्ट्रेलिया और भारत के सभी खिलाड़ियों ने भाग लिया है। मैच के दृश्य भी हाल ही में संपन्न ऑस्ट्रेलिया-भारत सीरीज के समय लिए गए हैं। इसमें प्रस्तुत क्रिकेट विश्वसनीय लगता है, नायक हरमन ने इसमें रितिक की नकल नहीं की है।
आजकल अजीज मिर्जा की ‘किस्मत कनेक्शन’ के प्रचार में शाहिद कपूर को शाहरुख की तरह पेश किया जा रहा है या प्रचारित किया जा रहा है। क्योंकि अजीज मिर्जा ने शाहरुख के साथ बहुत सी फिल्में की हैं और संभव है कि उनकी निर्देशकीय शैली में शाहरुखी अदा स्थायी की तरह शामिल हो गई हो। ‘जब वी मैट’ के बाद यह शाहिद की पहली फिल्म है और पहले कभी उन पर शाहरुख की नकल का आरोप नहीं था। अगर शाहिद को कहीं से प्रेरणा लेना ही है तो उनके पिता पंकज कपूर महान अभिनेता हैं। अजीज मिर्जा हमेशा ही साफ सुथरी पारिवारिक मनोरंजन की फिल्में बनाते रहे हैं और ‘किस्मत कनेक्शन’ भी ‘चलते-चलते’, ‘यस बॉस’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ और ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ की तरह ही स्वस्थ मनोरंजन प्रस्तुत करेगी, ऐसी आशा की जा सकती है। शाहिद पर शाहरुख की छवि के असर वाला प्रचार महंगा पड़ सकता है।
इसी फिल्म की नायिका विद्या बालन भी अपनी पारंपरिक पारिवारिक लड़की की ‘परिणीता’ वाली छवि को बदलकर आधुनिका के रूप में प्रस्तुत होना चाहती हैं। एक पुरस्कार समारोह में शाहरुख खान ने विद्या बालन को सबसे फूहड़ कपड़े पहनने वाली लड़की कहा था। सार्वजनिक मंच से लोगों का अपमान करने का ठेका शाहरुख ने लिया है। बॉक्स ऑफिस पर अर्जित सफलता इस तरह अपमान करने का अधिकार देती है। बहरहाल विदेशी फैशन के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
फिल्म उद्योग में ड्रेस डिजाइनर जमकर धन कमाते हैं। यह बात कब की भुलाई जा चुकी है कि कपड़े आरामदायक मात्र होना चाहिए और उन्हें पहनकर शरीर संचालन में कोई असुविधा नहीं हो। बेचारी विद्या बालन ने यही किया और उसे फूहड़ करार दिया गया। अजीज मिर्जा के लिए शाहरुख बुरी लत की तरह हैं जो लाख कोशिश करने पर भी छूट नहीं रही है। शायद इसीलिए शाहिद को इस तरह प्रचारित किया जा रहा है।