मैनेजमेंट फंडा.भारतीयों को दुनिया में अत्यधिक हाजिरजवाब और बुद्धिमान समझा जाता है, लेकिन कछ लोगों का मानना है कि हममें ज्ञानशक्ति हासिल करने की भूख दूसरों से कम है। वेदांत विद्वान स्वामी पार्थसारथी जैसे लोगों का तर्क है कि बड़ी संख्या में भारतीय अपने बच्चों को विदेशी विश्वविद्यालयों में भेजते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि असली ज्ञान की बातें यहीं पर होती हैं और बच्चों में जीवन के व्यापक विचार और ज्ञान की भूख का जन्म यहीं होता है।
हमें यह बात जान लेनी चाहिए कि ज्ञानशक्ति और विचार शक्ति का निवास हमारे मस्तिष्क में होता है। यहीं पर दुनिया भर का ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल करने की जिज्ञासा पैदा होती है। बुद्धि और समझ के माध्यम से जीवन में विचारों का प्रयोग काफी जरूरी है।
कुछ यूरोपीय और अमेरिकन नागरिकों के पास विचार शक्ति अधिक होती है और यही वजह है कि हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों का निर्माण किया जाता है। इसके बावजूद जिस अनुपात में इन्होंने अध्ययन और ज्ञान का भंडार एकत्रित किया है, उस अनुपात में उनका प्रयोग आमजीवन में नहीं किया गया। यही वजह है कि कई भारतीयों ने अज्ञात क्षेत्रों में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं, क्योंकि उनके ज्ञान के प्रयोग वास्तविक जीवन में कही अधिक श्रेष्ठ साबित हुए हैं।
राजनेता और दौलतमंद लोग अपने बच्चों को थोड़े समय के लिए ही विदेश अध्ययन को इसलिए भेजते हैं ताकि वे दुनियाभर की बेहतर चीजें आत्मसात कर सकें। इसका सीधा सा मतलब है कि वे विचार शक्ति और बुद्धि दोनों का सही उपयोग सीख जाएं। फंडा यह है कि विचारशक्ति और समझ के स्वामी अपने जीवन में सफलता के नए मुकाम हासिल करते हैं।