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तीन कैबिनेट मंत्रियों की समिति गठित

राजधानी हरियाणा. हरियाणा सरकार ने राज्य में भू-जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और इस संबंध में एक विधेयक तैयार करने के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित की है। यह जानकारी हरियाणा के कृषि मंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि राज्य में गिरते हुए भू जल स्तर पर निगरानी रखने के लिए हरियाणा कृषि विभाग के भू जल प्रकोष्ठ ने राज्य की 20 वर्ग किलोमीटर में 2105 ग्रिड आकलन केन्द्र स्थापित किए हैं, जिनमें वर्ष में दो बार मानसून से पहले और मानसून के बाद परिवीक्षण किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि भू जल त्वरित पुनर्भरण योजना के अन्तर्गत अब तक 257 संरचनात्मक वर्षा जल संरक्षण ढांचे निर्मित किए गए हैं और इन पर 151.81 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है तथा इंजेक्शन बोर वैल तकनीक के माध्यम से इनमें भू जल के रिचार्ज के आवश्यक उपाय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक वर्षा जल संरक्षण ढांचे राज्य के सभी सरकारी भवनों में बनाए गए हैं।

चट्ठा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान संरचनात्मक वर्षा जल संरक्षण ढांचे निर्माण योजना के अन्तर्गत 75 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है, ‘‘पानी पंचायतों’’ के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जन चेतना जागृत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू जल के विवेकसम्मत उपयोग के लिए विभिन्न जिलों में आयोजित किसान संगोष्ठियों में कृषि विभाग द्वारा सक्रिय भागीदारि की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग ने जल संरक्षण की तकनीकें भी क्रियान्वित की हैं, जिसके तहत किसानों को सिंचाई की छिड़काव एवं टपकन प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। सबसिडी दरों पर उन्हें ये सैट उपलब्ध करवाया जाता है। विभाग ने साठी धान की रोपाई को रोकने के लिए एक सघन कार्यक्रम चलाया हुआ है और इसी के परिणामस्वरूप साठी धान के अधीन 60 हजार एकड़ घटकर 500 एकड़ से भी कम रह गया है। किसानों को साठी धान के स्थान पर समर मूंग एवं हरी खाद के लिए ढैंचा की फसल अपनाने के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।





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