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सर सलमान

भारतीय मूल के इस अंग्रेजी लेखक का जन्म संयोग से उसी वर्ष हुआ था, जिस के बारे में किताब लिखकर वह दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गया है। आलोचकों का कहना है कि उनके लेखन का स्टाइल वास्तविकता को जादुई तरीके से प्रस्तुत करने जैसा है। उन्हें पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के संबंधों और उससे पैदा हो रहे प्रभावों पर कलम चलाने मंे मजा आता है। वे भारत के उन गिने-चुने नामों में शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति ही स्टाइल का अहसास देती है।

आधुनिक और खुली जीवन शैली के बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत में गंभीर लेखन के प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि तस्लीमा नसरीन और उनके विषय में कहा तो यही जाता है कि दोनों का लेखन और विवाद चोली-दामन जैसे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ख्याति और मुस्लिम जगत में फतवे ही उनकी नियति है। ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें सर की उपाधि देने पर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वैसे रुशदी का निजी जीवन भी कम रोचक नहीं रहा है।

जीवन और लेखन

रुशदी का जन्म मुंबई में हुआ था। उनकी कालेज की शिक्षा कैम्ब्रिज में हुई, जहां वे इतिहास के छात्र थे। इस दौरान उन्होंने एडवरटाइजिंग कंपनियों के लिए भी काम किया। बाद में शौक के चलते वे फुल टाइम लेखक बन गए।

चार बार शादियां करने वाले इस रसिक लेखक ने क्लेरिसा लार्ड, एक अमरीकी लेखिका मेरियाने विंगिंस, एलिजाबेथ वेस्ट और बाद में हीरोइन पद्मालक्ष्मी से विवाह किया। एक अमेरीकी लाइव टीवी शो टाप चीफ के दौरान ही दोनों ने अपनी शादी खत्म कर ली।

नए लेखकों की प्रेरणा

विवादित होने के बावजूद वे गंभीर और नए लेखकों की प्रेरणा हैं। इमोरे यूनिवर्सिटी में वे हर साल एक माह के लिए पढ़ाने आते हैं। साहित्य के छात्रों के साथ उनके ग्रुप डिस्कशन चलते हैं। पांच साल से उनका यह क्रम जारी है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वे एक फिल्म कलाकार बनना चाहते थे, मगर ऐसा हो नहीं सका। इसके अलावा वे कई प्रसिद्ध फोरम से भी जुड़े हुए हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दीपा मेहता का साक्षात्कार भी लिया था, जो अंग्रेजी पत्रिकाओं में काफी चर्चित रहा।

आधी रात की संतानें

1981 में प्रकाशित यह उपन्यास न सिर्फ बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया, बल्कि 1993 में इसे बुकर आफ बुकर्स से भी सम्मानित किया गया। यह बुकर पुरस्कारों के 25 वर्ष पूरे होने पर अब तक के सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए दिया गया था। टाइम पत्रिका ने इसे 19वीं सदी के सौ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उपन्यासों में शामिल किया है। दिलचस्प यह है कि 1923 के बाद से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला यह एकमात्र उपन्यास है।

इस उपन्यास का कथानक भारत की आजादी और विभाजन के पहले और बाद के उस घटनाक्रम पर आधारित है, जो 15 अगस्त 1947 को घटा था। उपन्यास का प्रमुख पात्र है सलीम सेनई जो उस पूरे पल को भोग रहा है।

एक लेखक कट्टरपंथियों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। इसका सबूत है मिड नाइट चिल्ड्रेन। इसके छपते ही कट्टरपंथियों ने डेढ़ लाख डालर से भी ज्यादा का इनाम रुशदी का सिर काटकर लाने वाले को देने की घोषणा की थी।

यहां तक कि इरान सरकार ने भी इस पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी। और उनके खिलाफ जारी फतवे का समर्थन किया था। हालांकि बाद में राजनैतिक परिवर्तन के चलते उनकी हत्या संबंधी बयान से इरान द्वारा इंकार कर दिया गया था।

फतवों और धमकियों के बीच रुशदी

>> रुशदी को सम्मान दिए जाने का सर्वाधिक विरोध 1988 में सेटेनिक वर्सेज के आरम्भिक दौर में प्रकाशित होने के बाद पाकिस्तान में हुआ था। वहां के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि हम ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें नाइटहुड की उपाधि दिए जाने का कड़ा विरोध करते हैं। संसद के निचले सदन ने सरकार समर्थित सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर रुशदी को ‘ईशनिन्दित ’ बताया।

>> सबसे आश्चर्यजनक घटना क्रम में पाकिस्तान धार्मिक मामलों के मंत्री इजाज उल हक ने संयुक्त राज्य ब्रिटेन के विरुद्ध आत्मघाती हमलों को मान्य किया। जब तक ब्रिटेन की सरकार ‘सर ’ की उपाधि लेकर क्षमा याचना नहीं करती, तब तक अपने शरीर पर कोई विस्फोटक बाँध कर आक्रमण करता है तो यह उचित होगा।

>> इजाज फल हक ने बाद में जोड़ा कि यदि पैगम्बर मोहम्मद के सम्मान की रक्षा में कोई आत्मघाती आक्रमण करता है तो उसका कृत्य न्यायसंगत है।

>> एक ट्रेड यूनियन ने रुशदी के सर पर 160,000 डालर के इनाम की घोषणा कर दी। ईरान की संसद के सभापति धोलामली हद्दादेल ने धमकी दी कि मुसलमान इस अविवेकपूर्ण और शर्मनाक कृत्य को बिना प्रतिक्रिया के नहीं जाने देंगे।

>> ऐसी प्रतिक्रियाओं ने बड़ी संख्या में इस्लामवादियों को सड़कों पर उतारने में सहायता की इनमें लन्दन में रहने वाले लोग भी थे।





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आपके विचार
deepak agnimitra
Wednesday, 16th Jul 2008, 11:17
सारगर्भीत लेख पसंद आया, रश्दी पर यह लेखन सराहनीय से ज्यादा साहसिक है, चक्रेश को बधाई.....
chandra shekhar
Saturday, 19th Jul 2008, 8:55
लेख् रुश्दी कॆ जीवन् पर् अच्छा प्रकाश् दॆता है पर् Midnight's Children पर् ज्यादा नही कह्ता. रुश्दी की हर क्रीति आकर्शन क कॆन्द्र् रही है. यॆह् उनकॆ लॆखन शैली का कमाल् है.
nagendra
Saturday, 26th Jul 2008, 12:38
this article is excellent where i read this Midnight's Children (e books)