कोटा.
कोटा बैराज में शनिवार को मिले शव की गलत शिनाख्त करने से बखेड़ा खड़ा हो गया। अंतिम संस्कार के बाद मृत युवती के असली परिजन सामने आ गए। दोनों पक्षों में इस बात को लेकर जमकर तकरार हुई। जांच में पता चला कि मीना उर्फ किरण जीवित है और शव महावीर नगर से लापता हुई छात्रा का है। अब पुलिस नए सिरे से मामले की जांच में जुटी हुई है।
महावीर नगर निवासी भवानीशंकर पारेता मंगलवार की सुबह महावीर नगर थाने पहुंचे और अपनी पुत्री सोनिका की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें उनका कहना था कि उनकी पुत्री शुक्रवार की रात को सहेली के साथ शादी समारोह में जाने के लिए कहकर निकली थी। जो वापस लौटकर नहीं आई। दो दिन तक तक वो अपने स्तर पर उसकी तलाश करते रहे लेकिन, जब सफलता नहीं मिली और समाचार पत्रों में युवती के शव मिलने की बात पता चली तो रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा।
पुलिस ने जब सोनिका का हुलिया देखा तो वो बैराज से मिले शव के हुलिए से मिलता-जुलता था। इस पर उन्होंने पारेता को शव के कपड़ों व चद्दर के बारे में बताया। शक होने पर पारेता कुन्हाड़ी थाने पहुंचे और पुलिस द्वारा जब्त किए गए चद्दर व कपड़े देखे। जिसे उन्होंने पहचान लिया। चद्दर उनके घर की थी और कपड़े सोनिका के थे। शव सोनिका का होने की बात सुनते ही कुन्हाड़ी थाने में हड़कंप मच गया।
साथ ही हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटे पुलिसकर्मियों को नई दिशा मिल गई। एएसपी लक्ष्मण मीणा के अनुसार उस समय पुलिस मीना के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवा रही थी। जिसमें उसकी लोकेशन भीलवाड़ा आ रही थी। जिस युवक के नाम से मोबाइल लिया गया था उससे पूछताछ की गई तो उसने भी मीना के भीलवाड़ा में होने की बात कहीं। इस पर पुलिस ने तत्काल एक टीम के साथ मीना के पति गिरीश ग्रोवर को भीलवाड़ा रवाना कर दिया। दोपहर में उन्होने एक मकान से मीना को बरामद कर लिया। मीना वहां अकेली रह रही थी। जिसे लेकर रात को पुलिस कोटा पहुंची।
अब इस दिशा में होगी जांच अब पुलिस इस बात की तस्दीक में जुटी हुई है कि अब वास्तव में सोनिका का ही था या किसी ओर का। शव सोनिका का था तो उसकी हत्या किसने और क्यों की? वो कौन सहेली थी जिसके साथ सोनिका शादी में गई थी। समाचार पत्रों में खबर छपने के बाद पूरे शहर में इस घटना की चर्चा थी उसके बावजूद सोनिका के परिजन दो दिन तक चुप क्यों रहे? शव के अंतिम संस्कार के बाद ही वो सामने क्यों आए? शव की गलत शिनाख्त करने के पीछे मीना के परिजनों का उद्देश्य क्या था? क्यों उन्होंने यह सब उसके ससुराल पक्ष को फंसाने के लिए किया या अनजाने में हुई गलती है।
शव को लेकर दोनों पक्ष हुए आमने-सामने
दादाबाड़ी निवासी पुरुषोत्तम अरोड़ा सोमवार को शव अपने घर ले गया और उसका अंतिम संस्कार कर दिया। मंगलवार को वहां शोक व्यक्त करने वाले बैठे हुए थे तभी भवानीशंकर वहां पहुंचा और यह रहस्योद्घाटन किया कि मरने वाली तुम्हारी बेटी नहीं थी बल्कि मेरी बेटी थी। तुम लोगों ने मेरी बेटी का दाहसंस्कार किया है। उसकी यह बात सुनकर मीना के परिजनों ने विरोध किया लेकिन, वह अपनी बात का कायम रहा लिहाजा दोनों पक्षों में तकरार हो गई। बाद में पुलिस व लोगों ने जैसे-तैसे उन्हें समझाकर शांत कराया।