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केबल लाइसेंस का प्रस्ताव

नई दिल्ली असंगठित केबल टीवी को एक व्यवस्था के तहत लाने के लिए दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने लाइसेंस जारी करने का प्रस्ताव रखा है। अभी केबल आपरेटरों को डाकघर में पंजीकरण कराना पड़ता है।

देशभर में करीब 30,000 पंजीकृत केबल टीवी आपरेटर हैं। कुछ आंकड़े बताते हैं कि यह संख्या करीब दोगुनी होगी। देश में 12.8 करोड़ घरों में टीवी है और उनमें से 7.8 करोड़ घरों में केबल व सैटेलाइट टीवी देखा जाता है।

अब डायरेक्ट टू होम (डीटीएच), हैडएंड इन द स्काई (हिट्स) और इंटरनेट प्रोटोकाल टीवी (आईपीटीवी) जैसी नई तकनीकें आ रही हैं।

ट्राई को लगता है कि केबल टीवी उद्योग का पुनर्गठन करने का समय आ गया है। ट्राई अब केबल टीवी उद्योग के लिए ज्यादा सख्त व्यवस्था लाने की योजना बना रहा है।

डीएनए मनी ने 10 जून 2007 को ट्राई के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा के हवाले से लिखा था कि ट्राई केबल टीवी के पुनर्गठन और मजबूत बनाने के काम में लगा है। इसलिए मौजूदा पंजीकरण की व्यवस्था की जगह ज्यादा सख्त व्यवस्था लाई जा सकती है। मंगलवार को ट्राई ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि मल्टी सिस्टम आपरेटरों (एमएसओ) और केबल आपरेटरों के लिए अलग-अलग लाइसेंस व्यवस्था लाई जानी चाहिए।

ट्राई की सिफारिशों में कहा गया है कि केबल आपरेटरों को डाकघरों के सीनियर सुपरिटेंडेंट के दफ्तर से जिला स्तर के लाइसेंस दिए जा सकते हैं। जो पांच साल के लिए होंगे। इसकी फीस 10,000 रुपए रखी जा सकती है। राज्य स्तर के केबल आपरेटरों के लिए लाइसेंस की फीस एक लाख रुपए रखी जा सकती है। नवीनीकरण के लिए भी एक लाख रुपए रखे जा सकते हैं। ट्राई ने लाइसेंस फीस के 10 फीसदी प्रशासनिक उपकर (या सेस) की सिफारिश भी की है। ऐसी स्थिति में सालाना लाइसेंस फीस जैसी कोई व्यवस्था नहीं होगी।

इस बीच सूचना और प्रसारण मंत्रालय और ट्राई मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाएंगे जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वाले केबल आपरेटरों को दंड दिया जा सके। इसके तहत उनके लाइसेंस के निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी।

ट्राई का कहना है कि मौजूदा केबल आपरेटर 12 माह के भीतर नई लाइसेंस प्रणाली में जा सकेंगे। ट्राई ने रोचक सुझाव यह दिया है कि ब्राडबैंड सेवाएं मुहैया कराने वाले लोकल केबल आपरेटर भी यूनीवर्सल सर्विस आब्लिगेशन फंड के तहत रखे जा सकते हैं। अभी दूरसंचार कंपनियां ही इसके तहत आती हैं।





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