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अस्पताल में तांडव की रात

भोपाल.हमीदिया अस्पताल में इससे पहले तक जूनियर डॉक्टरों द्वारा मरीज या उनके परिजन के साथ मारपीट के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस के साथ मारपीट की यह संभवत: पहली घटना है, जो बीती रात करीब तीन बजे घटी।

मामले की शुरुआत सोमवार रात उस समय हुई जब कोहेफिजा स्थित बीडीए कॉलोनी निवासी अफरोज खान बीमार मां को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जा रहे थे। अफरोज की मां और भाई कार में थे जबकि वे स्कूटर पर थे। पुलिस के अनुसार कोहेफिजा अस्पताल के पास नशे में धुत तीन युवकों ने अफरोज को रोककर गाली गलौज कर मारपीट शुरू कर दी। जिनके नाम गांधी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी हैप्पी वर्मा, ओमकार सिंह और दिनेश पटेल बताए गए हैं।

उन्होंने झगड़े में बीच-बचाव करने वहां पहुंचे लोगों पर भी हमला बोला तथा वाहन के कांच फोड़ दिए। सूचना मिलने के बाद कोहेफिजा थाने के सब इंस्पेक्टर विजय गोठारिया, हवलदार महेश चंद शर्मा और सिपाही रमाशंकर सेंगर मौके पर पहुंचे। तब तक झगड़े में घायल एक डॉक्टर के सिर से खून निकलने लगा था। पुलिसकर्मी उसे हमीदिया अस्पताल ले गए। इस बीच घायल के साथियों ने मेडिकल छात्रों को बताया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है।

इस पर लाठी-डंडे से लैस छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। इसमें श्यामला हिल्स थाने से मेडिकल चैकअप कराने आया सिपाही बृजभूषण भी घायल हो गया। उत्तेजित छात्रों ने कोहेफिजा और श्यामला हिल्स थाने की गाड़ियों में तोड़-फोड़कर आग लगाने की कोशिश की। छात्रों को काबू में करने पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। मौके से ही 36 छात्रों को गिरफ्तार किया।

जेल गए: छात्र पवन गुप्ता, महेंद्र रघुवंशी, विनय शिवहरे, अभिषेक जैन, अक्षय जैन तथा अन्य को गिरफ्तार कर मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

दूसरा मुकदमा शासकीय कार्य में बाधा, शासकीय संपत्ति को नुकसान, तोड़फोड़ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का एसआई विजय गोठारिया की शिकायत पर किया गया है। पुलिस ने इस मामले में मेडिकल के छात्र पवन गुप्ता, महेंद्र रघुवंशी, विनय शिवहरे, अभिषेक जैन, अक्षय जैन तथा अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर पांचों आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है। इनको मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके अलावा 31 छात्रों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक धारा (151) के तहत कार्रवाई की गई।

31 छात्रों के खिलाफ 151 की कार्रवाई

मनतरन सिंह, अनुज गुप्ता, श्रीकृष्ण साध्य, सोनक बलामे, अक्षय जैन, अतुल सिंह, विकास पटेल, अविनाश ठाकुर, पीयूष महराणा, ज्योतिकृष्णा, जितेंद्र गावडिया, अमित राहमडाले, घनश्याम अहिरवार, पवन कुमार, स्वजीत पेंडलकर, राजेंद्र मंडलोई, शरद भंडारी, स्वप्निल सिंह, रंजीत चौहान, आशीष गुप्ता, देवेंद्र नरगावे, अविनाश प्रताप सिंह, स्वप्निल गार्वे, राजेश कुमार, मनीष शाक्यवाल, सुनीत अग्रवाल, राहुल छोटपेरे, बृजमोहन गुप्ता, राजेश नायर, प्रदीप सरवक्या और दिनेश मालवीय के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धारा के तहत कार्रवाई की गई है।

नहीं मिला इलाज

मेडिकल छात्रों की पिटाई से गंभीर घायल हुए एसआई और अन्य पुलिसकर्मियों को जब हमीदिया अस्पताल में मेडिकल के लिए ले जाया गया तो वहां के डाक्टरों ने उनका इलाज करने से मना कर दिया।

मेडिकल छात्र अनुशासित रहें और कानून व्यवस्था बनाए रखें इसके लिए गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन को पत्र लिखा जा रहा है। पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने वाले छात्रों की सूची भी प्रबंधन को उपलब्ध कराई जा रही है।

डीन और जूडा ने कहा छात्र दोषी

हमीदिया अस्पताल में बीती रात हुई हिंसक वारदात के बाद वहां का परिसर पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। दूसरी ओर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और अस्पताल प्रबंधन ने पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपी विद्यार्थियों से खुद को अलग कर लिया है। जिसके चलते छात्रों पर प्रकरण दर्ज होने तथा उनकी गिरफ्तारी के बावजूद मंगलवार को अस्पताल का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। मंगलवार को दिनभर अस्पताल में बीती रात के वाकये की चर्चा होती रही।

किसी अप्रिय स्थिति से निपटने वहां पुलिस बल भी तैनात नजर आया। हालांकि कुछ मेडिकल छात्रों ने इस मसले पर आंदोलन का वातावरण तैयार करने की कोशिश की किंतु अस्पताल प्रबंधन सहित जूडा ने इससे असहमति जताई। कालेज प्रशासन और जूडा का कहना है कि पुलिस के साथ मारपीट करने वाले अंडर ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों की लिस्ट शासन से आने के बाद कालेज की अनुशासन कमेटी में यह तय करेगी दोषी छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

इधर, जूडा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीवन सिंह मीणा ने इस घटना को मेडिकल छात्रों की गलती मानते हुए स्पष्ट कहा कि इस मामले पर कोई आंदोलन नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से इंकार कर दिया।

-जयदीप प्रसाद, एसपी

ऐसी घटनाओं से डॉक्टरों की छवि पर गलत असर होता है। दोषी छात्रों का भविष्य संकट में आ सकता है।

-डॉ. निर्भय श्रीवास्तव, डीन, मेडिकल कॉलेज





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