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20 साल बाद इंटर स्टेट बस स्टैंड मंजूर

मंडी.‘गेट वे ऑफ मनाली’ के नाम से मशहूर मंडी शहर में इंटर स्टेट बस स्टैंड के निर्माण की दिशा में सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। केंद्रीय वन मंत्रालय ने इसके बस स्टैंड के निर्माण के लिए 20 साल बाद 0.22 हैक्टेयर फॉरेस्ट लैंड एचपी बस स्टैंड मैनेजमेंट एंड डवलपमेंट अथॉरिटी के नाम ट्रांसफर कर दी है। वन मंत्रालय के नॉर्थ जोन कार्यालय चंडीगढ़ ने इस बारे में मंडी के वन मंडल अधिकारी, एचआरटीसी के आरएम को सूचित किया है।

20 पेड़ों पर चलेगी कुल्हाड़ी करोड़ों की लागत से बनने वाले इस बस स्टैंड के लिए 20 पेड़ों को काटा जाएगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने पेड़ों को काटने की मंजूरी भी दे दी है। इसके लिए वन विभाग के पास फीस जमा करवानी पड़ेगी।

शिफ्ट होगा पेट्रोल पंप

बस स्टैंड के निर्माण के रास्ते में आने वाले पुराने बस स्टैंड पर एचआरटीसी के पेट्रोल पंप को अब सौली खड्ड के पास शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी से परमिशन मांगी गई है।

खूब हुई सियासत 20 साल से बस स्टैंड के निर्माण को लेकर कांग्रेस-भाजपा के बीच सियासी खेल होता आया है। सदर के कांग्रेसी विधायक अनिल शर्मा दावा करते रहे हैं कि जब वे सांसद थे तो उन्होंने इसके लिए सांसद निधि से 50 लाख स्वीकृत करवाए थे। 1987 के विधाससभा चुनाव में इस बस स्टैंड की सही तरीके से बनाने का मुद्दा काफी गरम रहा था। इसके बाद बतौर केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री पंडित सुखराम ने 23 सितंबर 1993 को इसका शिलान्यास तक कर दिया। उस समय यहां 150 दुकानें बनाना भी योजना में शामिल था।

प्रोजेक्ट पर 150 करोड़ खर्च बताया गया था। 1998 में भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही मुंबई की एक फर्म से 16 करोड़ में बस स्टैंड बनाने का एग्रीमेंट किया गया। सरकार फिर बदली और 2003 में कांग्रेस के सत्ता में आते ही एक और कंपनी से 8 करोड़ में बस स्टैंड बनाने का समझौता हुआ। इसके बाद से यह प्रोजेक्ट लटकता रहा था।





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