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अब जलग्रस्त भूमि उगलेगी सोना

करनाल. देश की जलग्रस्त, लवण एवं क्षारीय भूमि अब बेकार नहीं रह सकेगी। इसके लिए वैज्ञानिकों ने गेहूं का प्रभेद(जीनोटाइप यानी किस्म का प्रारंभिक रूप) केआरएल-99 ढूंढ लिया है। इस जीनोटाइप में भूमि की जलग्रस्तता के साथ-साथ लवणीयता और क्षारीयता को सहने की जबरदस्त क्षमता है। सीएसएसआरआई ने अपनी इस खोज को नेशनल ब्यूरो प्लांटेशन जेनेटिक्स रिसोर्स नई दिल्ली में रजिस्टर्ड भी करा दिया है। कुछेक शोध के उपरांत किसानों को इसका बीज खेती के लिए उपलब्ध होगा, जिसकी पैदावार प्रति एकड़ 40 से 45 क्विंटल मिलेगी।

सीएसएसआरआई के वैज्ञानिक पिछले दस सालों से गेंहू की किस्म के इस प्रभेद केआरएल-99 के अनुसंधान में जुटे हुए हैं। इससे पूर्व संस्थान के वैज्ञानिक केआरएल 1-4 तथा केआरएल-19 किसानों को उपलब्ध करा चुके हैं, लेकिन उक्त दोनों किस्मों में लवण एवं क्षारीयता को सहन करने के साथ वाटर लोगिंग को सहने की क्षमता नहीं है। पहले से ही जलग्रस्त भूमि के साथ-साथ केआरएल-99 उन किसानों को समस्याओं के वरदान बनेगी, जिनकी जमीन ऊंची-नीची है। ऐसी जमीन में ंिसंचाई करने से फसल में जगह-जगह पानी का जमाव हो जाता है, जिससे पानी ठहराव वाले स्थानों पर फसल कमजोर पड़ जाती है या फिर मर जाती है, लेकिन केआरएल-99 क्षारीय व वाटर लोगिंग की समस्या के बावजूद गेहूं की बंपर पैदावार देगी। हालांकि संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. नीरज कुलश्रेष्ठ इस अनुसंधान के तहत केआरएल-99 में और इंप्रूव के प्रयास जारी रखेंगे।

इस तरह के बीज से देश के नोर्थ वेस्टर्न और नोर्थ ईस्टर्न की वाटर लोगिंग भूमि में भी गेहूं की अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। 25 प्रतिशत अधिक देना होगा बीज : केआरएल-99 प्रभेद बनने वाले गेहूं की किस्म की बिजाई करते समय आम बीजों की अपेक्षा 25 प्रतिशत बीज अधिक डालना पड़ेगा जबकि फर्टिलाइजर और सिंचाई सामन्य बीजों के समान रहेगी। बिजाई 20 नवंबर से पहले करनी होगी। पौधे की लंबाई 85-90 सेंटीमीटर तक होगी।

पिछले दस सालों के अनुसंधान से गेहूं की किस्म के ऐसे प्रभेद केआरएल-99 को ढूंढने में सफलता मिली है, जिसमें लवणीय एवं क्षारीय भूमि के साथ-साथ जलग्रस्तता में अच्छी पैदावार देने की क्षमता है। इसको और अच्छा बनाने के लिए अनुंसधान जारी रखा जाएगा। अनुसंधान में बीमारियों के प्रति रोगप्रतिरोधक क्षमता व अनाज की क्वालिटी पर जोर दिया जा रहा है।

-डा. नीरज कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएसएसआरआई करनाल।

भारत में 2.46 मिलियन हेक्टेयर भूमि जलाक्रांत है। हरियाणा में कुल भूमि का 10 प्रतिशत भूमि जलग्रस्त है। जलग्रस्त भूमि में गेहूं की पैदावार बढ़ने में अनाज उत्पादन में अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी।

-डा. गुरबचनसिंह, निदेशक सीएसएसआरआई करनाल।





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