नई दिल्लीदेश के 12 राज्यों में नक्सलवाद के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पूरे मामले में सीधी नजर रखने का मन बना लिया है। अब तक नक्सल मामले सिर्फ गृह मंत्रालय के अधीन थे। इस काम के लिए कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में कुछ अन्य प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों को भी शामिल किया गया है।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कमेटी की पहली बैठक 18 जुलाई को होनी थी, लेकिन 21-22 जुलाई को विश्वास मत संबंधी विशेष संसदीय सत्र को देखते हुए इसके फिलहाल टलने की आशंका है। प्रशासनिक हलकों में जहां नक्सल मामलों में पीएमओ के शामिल होने को गृह मंत्रालय की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं गृह मंत्रालय के सूत्र इससे इनकार कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी दरअसल विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वयन के लिए है। इसका उद्देश्य नक्सली इलाकों में चलाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यो में भी तालमेल बनाना है। ताजा कमेटी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संसद में दिए गए उस वक्तव्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया था।
उसी वक्त उन्होंने यह बात भी कही थी कि इस समस्या से केवल ताकत के बूते नहीं निपटा जा सकता। नक्सली हिंसा की घटनाओं में वर्ष 2006 (1509) की तुलना में 2007 में मामूली इजाफा (1565) देखा गया है। इनमें हिंसा की कुल घटनाओं में से 67.99 फीसदी और कुल हत्याओं में से 75.57 फीसदी छत्तीसगढ़ व झारखंड में हुई। वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ के 81 और वर्ष 2007 में 71 थाने नक्सल प्रभावित रहे।