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अब देसी हुए काल सेंटर

मुंबई. किसी काल सेंटर में फोन मिलाने पर दूसरी छोर से ठेठ पंजाबी या गुजराती लहजे में जवाब मिले तो चौंकने की जरूरत नहीं। अब काल सेंटर भी देसी हो चले हैं। घरेलू बाजार पर पकड़ बनाने के लिए काल सेंटर कंपनियां क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल पर जोर दे रही हैं।

15 से ज्यादा भाषाओं का प्रयोग

बैंकिंग, इंश्योरेंस, टेलीकॉम, फाइनेंशियल सर्विसेज और रिटेल क्षेत्र के ग्राहकों की जरूरतों के मद्देनजर काल सेंटर पंजाबी, मराठी, गुजराती, असमी व उड़िया जैसी 15 प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में सेवाएं दे रहे हैं।

रोजगार के नए अवसर

नए काल सेंटरों में अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ने से इन भाषाओं के जानकार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। ये युवा स्थानीय लोगों को उसी भाषा में ज्यादा जानकारी उपलब्ध करवा सकते हैं।

वेतन कम

भले ही क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार युवाओं को काल सेंटर्स में नौकरियां मिलने लगी हैं, लेकिन उनका वेतनमान आज भी अंग्रेजी भाषी कर्मियों की तुलना में बेहद कम है।

घरेलू बाजार पर एक नजर>> बीपीओ के घरेलू बाजार का मूल्य 1.6 अरब डॉलर है।

>> इसमें 50 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं।

>> पांच लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।

>> रोजगार की संभावनाएं प्रति वर्ष 50 फीसदी की दर से बढ़ रही हैं।

>> क्षेत्रीय भाषा बोलने वालों को अंग्रेजी भाषी कर्मचारियों से 40 फीसदी तक कम वेतन दिया जाता है।

तुलनात्मक वेतन (प्रति माह)

कर्मचारी औसत वेतन

क्षेत्रीय भाषा 7500-10500

अंग्रेजी भाष 15000-20000

क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारी गांवों, कस्बों व छोटे शहरों के लोगों की समस्या का निदान बेहतर ढंग से कर सकते हैं।

-राधिका बालसुब्रामणियम, सीओओ इंटलनेट ग्लोबल सर्विसेज





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Neeraj duivedi
Friday, 18th Jul 2008, 12:48
very good news for unemployment yoth
Vikas
Friday, 18th Jul 2008, 16:18
Its too good atleast they are given employment opputunities
अनुनाद सि
Saturday, 19th Jul 2008, 10:36
बहुत खुशी की बात है। कब तक असहज बने रहा जा सकता है? कृत्रिमता के अन्त के आरम्भ का स्वागत है!