मुंबई.
यदि आप लैबराडोर, जर्मन शेफर्ड और डाबरमैन जैसी महंगी नस्ल के अपने कुत्ते की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, तो बाजार में उपलब्ध एक माइक्रोचिप लगाकर निश्चिंत हो जाइए। मुंबई के दादर इलाके में रहने वाले पशु चिकित्सक डॉ. मकरंद चौहान के मुताबिक यह चिप वास्तव में एक ट्रांसपोंडर है और इसका साइज लगभग चावल के दाने के बराबर है। इसमें कुत्ते की नस्ल, मालिक का नाम-पता और टेलीफोन नंबर अंकित होता है। एक बार प्रत्यारोपित करने के बाद यह चिप नंगी आंखों से दिखाई नहीं देती।
इसे सिर्फ स्कैनर की मदद से देखा जा सकता है।झटपट और दर्द रहित :
इस चिप को इंजेक्शन की मदद से कुत्ते के बाएं कंधे में त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है। दर्द रहित इस प्रक्रिया में काफी कम समय लगता है। इस चिप की कीमत 500 से 1,000 रुपए तक है। डॉ. चौहान ने बताया कि एक बार चिप फिट हो गई, तो फिर आपका कुत्ता नहीं खो सकता। इस तरह की हर चिप का एक खास नंबर होता है, जिसका डुप्लीकेट तैयार नहीं किया जा सकता। चिप की मदद से गुम हुए कुत्ते को आसानी से खोजा जा सकता है।
तब होती है दिक्कत :
डॉ. दीपा कात्याल के मुताबिक यह चिप डॉग शो और कम्पटीशन के दौरान कुत्तों की पहचान करने में काफी मददगार है। उन्होंने कहा कि शो में प्राय एक जैसे दिखाई देने वाले कुत्ते होते हैं। ऐसे में उनकी पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है, लेकिन उनमें यदि माइक्रोचिप फिट हो तो यह काम आसान हो जाता है। केनेल क्लब ऑफ इंडिया (केसीआई) ने भी उसके यहां पंजीकृत हर कुत्ते में माइक्रोचिप लगाने का निर्देश दे रखा है ताकि उसकी पहचान सुनिश्चित रहे। माइक्रो चिप से यह भी सुनिश्चित हो जाता है कि कुत्ते चुराए न जा सकें।